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Public Outrage :- अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जन आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर उतर आया

देहरादून 04 जनवरी 2026।

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में आज रविवार को अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जन आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर उतर आया।

तीन साल पुराने इस चर्चित मामले में कथित ‘वीआईपी’ की संलिप्तता के नए आरोपों ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा रखी है।

परेड ग्राउंड से शुरू हुआ विभिन्न पार्टी व सामाजिक संगठनों के साथ सर्वदलीय मुख्यमंत्री आवास कूच में कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों के नेता-कार्यकर्ता, महिला संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है – अंकिता भंडारी को न्याय दिलाओ, कथित वीआईपी के नाम का खुलासा करो और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराओ।

यह मार्च उत्तराखंड महिला मंच और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स के आह्वान पर आयोजित किया गया था, जिसमें अंकिता के परिवार के सदस्यों की भी मौजूदगी रही।

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर थामे रखे थे, जिन पर लिखा था – “अंकिता को न्याय दो”, “वीआईपी का नाम उजागर करो”,सीबीआई जांच कराओ” और “महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करो”

नारेबाजी के बीच पूरा वातावरण गुस्से और आक्रोश से भरा हुआ था। लोग अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध जता रहे थे।

– कोई प्लेकार्ड दिखा रहा था, तो कोई जोर-जोर से सरकार के खिलाफ नारे लगा रहा था।

जैसे ही मार्च सीएम आवास की ओर बढ़ा, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगा रखी थी।

आक्रोशित भीड़ ने पहली बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की और आगे बढ़ने लगी।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखना चाहते हैं,

लेकिन पुलिस ने उन्हें अगली बैरिकेडिंग से पहले ही रोक दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, लेकिन किसी बड़े हंगामे की सूचना नहीं है।

पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया, बल्कि बैरिकेड्स के जरिए भीड़ को काबू में रखा।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों की जुबान पर एक ही नारा गूंजता रहा – “अंकिता भंडारी को न्याय दो, वीआईपी के नाम का खुलासा करो!

” कई महिलाओं ने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की बेटियों की अस्मिता का सवाल है।

कांग्रेस महिला अध्यक्ष ज्योति रौतेला और कई नेता और कार्यकर्ता सबसे आगे थे, जिन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर वीआईपी को बचा रही है।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने कैंडल जलाकर मौन प्रदर्शन भी किया, जबकि अन्य ने सड़क पर धरना देकर अपनी मांगें दोहराईं।

यह आक्रोश हाल के दिनों में सामने आए नए खुलासों से और भड़का है। अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर वीडियो और ऑडियो जारी कर दावा किया कि मामले में एक वरिष्ठ भाजपा नेता का नाम जुड़ा है।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में कोई वीआईपी संलिप्त नहीं पाया गया और कथित ‘वीआईपी’ नोएडा का एक सामान्य व्यक्ति था।

फिर भी जनता का गुस्सा थम नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सीबीआई जांच नहीं हुई तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।

पूरे प्रदेश में देहरादून के अलावा अन्य जिलों में भी छोटे-बड़े प्रदर्शन हुए, जहां लोग सड़कों पर उतरे और न्याय की गुहार लगाते रहे।

अंकिता भंडारी हत्याकांड 2022 का है, जिसमें रिसॉर्ट की रिसेप्शनिस्ट अंकिता की हत्या कर शव नहर में फेंक दिया गया था।

कोर्ट ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, लेकिन ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ और वीआईपी एंगल के सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।

यह मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जनता का संदेश साफ है – न्याय में देरी अन्याय है। देखना यह है कि सरकार इस बढ़ते आक्रोश पर क्या कदम उठाती है।

मुख्यमंत्री आवास कूच में जनवादी महिला मोर्चे की अध्यक्ष इंदु नौडियाल के कई महिला कार्यकर्ता मौजूद रही। उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, निर्मला बिष्ट व महिला कार्यकर्ता मौजूद रही।

मुख्यमंत्री आवास कूच में उत्तराखंड से ही नहीं उत्तराखंड से लगते उत्तर प्रदेश से भी साध्वी अपने कार्यकर्ता के साथ इस आंदोलन में शामिल हुई।

सीपीएम और सीटू के साथ यूकेडी उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ता केेे साथ विभिन्न पार्टी केे कार्यकर्ता के साथ ही युवा वर्ग भी मुख्यमंत्री आवास कूच में शामिल रहे।

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