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Pottery:- मिट्टी के दीयों और मूर्तियों से संवरेगी ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, माटीकला को बढ़ावा देने की पहल तेज

  पंचूर वार्ता | वोकल फॉर लोकल

हरिद्वार, 03 नवंबर 2026।

भारतीय संस्कृति और परंपरा में मिट्टी के दीयों और मूर्तियों का विशेष स्थान रहा है। आधुनिकता के दौर में धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही,

इस पारंपरिक कला को फिर से जीवंत करने और स्थानीय कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए जनपद में माटीकला बोर्ड रुड़की की ओर से विशेष पहल की जा रही है।

इस पहल के माध्यम से न केवल पारंपरिक कुम्हारी कला को संरक्षण दिया जा रहा है,

बल्कि ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन को धरातल पर उतारने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों के तहत यह अभियान संचालित किया जा रहा है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और रीप परियोजना के सहयोग से माटीकला को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इसके तहत रुड़की में लिथोप्रेस के समीप महिलाओं एवं पुरुषों को मिट्टी के आकर्षक दीये और मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

माटीकला बोर्ड के उपाध्यक्ष शोभाराम प्रजापति ने बताया कि प्रत्येक दो माह में 25-25 लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अब तक 50 लोगों को इस पारंपरिक कला का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को दीये बनाने वाली मशीनें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं,

ताकि वे स्वयं अपना रोजगार शुरू कर सकें और नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बनें।

उन्होंने कहा कि माटीकला बोर्ड का उद्देश्य स्थानीय हुनर को प्रोत्साहित करने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को बढ़ाना है।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि माटीकला बोर्ड के माध्यम से हस्तनिर्मित मिट्टी के दीये और मूर्तियों को आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है।

उत्पादों की गुणवत्ता के साथ उनकी पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है,

ताकि बाजार में इन्हें बेहतर पहचान मिल सके और उपभोक्ता स्थानीय उत्पादों की ओर आकर्षित हों।

उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीये और मूर्तियां हमारी पौराणिक संस्कृति एवं परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं।

ऐसे में इस पारंपरिक कला को संरक्षित करना और इससे जुड़े कारीगरों को प्रोत्साहित करना जरूरी है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की पहल पर एनआरएलएम एवं रीप परियोजना के माध्यम से माटीकला बोर्ड को सहयोग दिया जा रहा है,

जिससे स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।

 दीपावली पर स्थानीय दीये खरीदने की अपील

मुख्य विकास अधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि दीपावली के पावन पर्व पर अपने घरों और प्रतिष्ठानों को सजाने के लिए स्थानीय कुम्हारों द्वारा तैयार मिट्टी के दीये एवं मूर्तियां खरीदें।

उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों के उत्पाद अपनाकर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती दी जा सकती है।

इससे ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा पारंपरिक कुम्हारी कला को भी नया जीवन मिलेगा।

माटीकला को बढ़ावा देने की यह पहल केवल दीये और मूर्तियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक विरासत को सहेजना,

स्थानीय हुनर को पहचान दिलाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है।

प्रशिक्षण, मशीनों की उपलब्धता और बाजार में उत्पादों की पहचान से स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

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