देहरादून में डेंगू की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 23,369 सैंपलों की जांच की गई है, जिनमें 118 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए गए।
इनमें से 108 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में केवल 10 मरीजों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
सबसे राहत की बात यह है कि अब तक डेंगू से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। यह आंकड़े स्वास्थ्य विभाग, नगर निकायों और आम जनता के संयुक्त प्रयासों का सकारात्मक परिणाम हैं।
हालांकि इन आंकड़ों से संतुष्ट होकर निश्चिंत हो जाना उचित नहीं होगा। डेंगू एक ऐसी बीमारी है जो मौसम में बदलाव और बारिश के बाद तेजी से फैल सकती है।
उत्तराखंड में सितंबर और अक्टूबर के महीने डेंगू के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में वर्तमान स्थिति को सफलता का अंतिम पड़ाव नहीं बल्कि सतर्कता बनाए रखने की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
यह भी उल्लेखनीय है कि समय पर जांच, मरीजों की पहचान और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के कारण गंभीर मामलों को नियंत्रित किया जा सका है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार सैंपलिंग और निगरानी की व्यवस्था ने संक्रमण को बड़े स्तर पर फैलने से रोका है।
दूसरी ओर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और स्वच्छता अभियानों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
फिर भी डेंगू के खिलाफ सबसे बड़ी लड़ाई घर-घर में लड़ी जाती है। एडीज मच्छर साफ पानी में पनपता है,
इसलिए घरों, छतों, कूलरों, गमलों और आसपास जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है।
यदि नागरिक स्वयं जागरूक नहीं होंगे तो प्रशासनिक प्रयास भी सीमित प्रभाव ही छोड़ पाएंगे।
देहरादून के लिए यह संतोष का विषय है कि अब तक कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन यही उपलब्धि आगे की जिम्मेदारी भी बढ़ाती है।
प्रशासन को निगरानी और रोकथाम के प्रयासों में कोई ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए तथा नागरिकों को भी व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता को अपनी प्राथमिकता बनाना होगा।
डेंगू के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों में नहीं जीती जाती, बल्कि जागरूकता, स्वच्छता और सामूहिक जिम्मेदारी से जीती जाती है।
वर्तमान आंकड़े उम्मीद जगाते हैं, लेकिन आने वाले हफ्तों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव साबित होगी।