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Closure:- प्राणिक हीलिंग एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा पर दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

देहरादून – वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय एवं निरामया योगम रिसर्च फाउंडेशन, हरिद्वार एवं उत्तराखंड आयुर्वेदिक कॉलेज ,देहरादून के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय 11वीं कार्यशाला का आज सफल समापन हुआ। “प्राणिक हीलिंग, रोग परीक्षण, पंचकर्म एवं आहार चिकित्सा” पर आधारित इस कार्यशाला में कुल 130 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

दूसरे दिन का संचालन डॉ. नम्रता भट्ट, चिकित्सा अधिकारी, आयुष विभाग, अल्मोड़ा द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों पर व्याख्यान दिया एवं एक व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र भी संपन्न कराया।

समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आज मॉडर्न साइंस में एआई और रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल विभिन्न रोगों के निराकरण के लिए हो रहा है,

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लेकिन बीमार और अस्वस्थ कर जीवन शैली का इलाज योग और आयुर्वेद के उपचारात्मक तकनीक पंचकर्म ध्यान कॉस्मिक हीलिंग जैसी तकनीक के ही द्वारा संभव है।स्टूडेंट को अपने कैरियर के साथ ही अपनी स्वास्थ्य का भी प्रबंधन इस माध्यम से सीखना चाहिए।

कार्यशाला की सह-अध्यक्ष डॉ. उर्मिला पांडे ने आयोजन स्थल पर विद्यार्थियों की समस्या का समाधान कास्मिक हिलिंग के द्वारा करते हुए कहा कि स्टूडेंट्स को अपने करियर के साथ ही अपने स्वास्थ्य का प्रबंध भी कॉस्मिक हीलिंग से सीखना चाहिए।

कार्यक्रम सचिव प्रो. मनोज कुमार पांडा ,, सह संयोजक कोनिका मुखर्जी एवं प्रतिभा रही।संकाय सदस्य  के.सी. मिश्रा,  अंशु सिंह, डॉ. आशीष नौटियाल, डॉ. सुरभि भट्ट, लोचन भट्ट,  डॉ अक्षत,डॉ सुजीत, डॉ विजय सहित विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञ अथर्व आयुर्वेद वैलनेस की डॉ शिवानी अग्रवाल के साथ ही 130 प्रतिभागियों की सहभागिता रही।

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कार्यशाला का उद्देश्य योग एवं आयुर्वेद आधारित उपचार पद्धतियों को व्यवहारिक रूप से समझाना और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को बढ़ावा देना रहा। आयोजन को प्रतिभागियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, जिससे भविष्य में और भी व्यापक स्तर पर ऐसे आयोजनों की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।

समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. ए.के. कांबोज, अध्यक्ष, उत्तराखंड आयुर्वेदिक कॉलेज तथा माननीय कुलपति प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा की गई। उनके प्रेरणादायी वक्तव्यों ने प्रतिभागियों को आयुर्वेद एवं योग चिकित्सा के प्रति नई दृष्टि प्रदान की।

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