देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वाधान में नौ दिवसीय ‘दून पुस्तक महोत्सव’ चल रहा है।
दून पुस्तक महोत्सव 2026 के दूसरे दिन ‘दून लिट फेस्ट’ का भव्य उद्घाटन हुआ, जिसमें साहित्य, समाज और ज्ञान के विभिन्न आयामों पर सार्थक चर्चा देखने को मिली।
उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, शिशु रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. आर. के. जैन, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,
भारत के अध्यक्ष प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे तथा देव भूमि यूनिवर्सिटी के उपाध्यक्ष अमन बंसल सहित कई अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन देते हुए प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे ने साहित्य की परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा,
“समाज के हित की बात जिसमें हो, वही साहित्य है। शब्दों और वाक्यों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति ही साहित्य है।”
उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सुमित्रानंदन पंत और शैलेष मटियानी जैसे महान साहित्यकारों के कारण यह परंपरा आज भी गौरवशाली बनी हुई है।
पद्मश्री डॉ. आर.के. जैन ने अपने संबोधन में पुस्तकों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने वैज्ञानिक माइकल फैराडे के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने पुस्तकों से प्रेरणा लेकर महान आविष्कार किए।
मुख्य अतिथि रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा,
“एनबीटी विश्वभर में पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान की सुगंध फैला रहा है।” उन्होंने कहा, “जो सोचता है, वही कवि और लेखक होता है।
जब आप लिखना शुरू करते हैं, तो आप स्वतः लेखक बन जाते हैं। शब्द ही ब्रह्मांड है और यह दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है।”
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अधिकारी एवं दून पुस्तक महोत्सव के सीनियर प्रोजेक्ट इंचार्ज अशोक धनखड़ ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर आयोजित ‘दून लिट फेस्ट’ के पहले सत्र में लेखक जुपिंदर सिंह ने अपनी पुस्तक ‘भगत सिंह की पिस्तौल की खोज’ पर विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने पुस्तक के लेखन के दौरान आई चुनौतियों को साझा करते हुए कहा कि “किसी भी शोध की शुरुआत आर्काइव से होती है।
” उन्होंने भगत सिंह से जुड़े रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि “भगत सिंह ने अपनी पिस्तौल केवल एक बार चलाई थी।”
साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगत सिंह की पिस्तौल को अपने हाथों में पकड़ना उनके लिए एक ऐतिहासिक अनुभव रहा।
कल दून बुक फेस्ट में ‘दून लिट फेस्ट’ के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा,
जिनमें बर्जिस देसाई द्वारा उनकी पुस्तक – ‘मोदीज मिशन’ पर विचार साझा किए जाएंगे।
इसके साथ ही कुलप्रीत यादव 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कम चर्चित पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
वहीं, आचार्य प्रशांत अपने सत्र ‘Truth Without Apology’ के माध्यम से सत्य, आत्मबोध और जीवन के गहरे प्रश्नों पर विचार रखेंगे।
महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में ‘वुमनिया बैंड’ द्वारा सूफी और क्लासिकल फ्यूजन गीतों की मनमोहक लाइव प्रस्तुति भी दी जाएगी, जो दर्शकों के लिए एक विशेष आकर्षण होगी।
दून पुस्तक महोत्सव 2026 के अंतर्गत आगामी दिनों में भी विभिन्न साहित्यिक सत्र, पुस्तक चर्चाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संवाद आयोजित किए जाएंगे, जो पाठकों और साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे।