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QR Code Controversy:- बदरीनाथ-केदारनाथ QR कोड विवाद फिर गरमाया, SIT जांच की मांग पर शासन सख्त; दो जिलाधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

पंचूर वार्ता | क्यूआर कोड विवाद

देहरादून, 04 नवंबर 2026।

वर्ष 2023 में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में सामने आए बहुचर्चित क्यूआर कोड विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय की शिकायत पर प्रदेश शासन ने मामले का संज्ञान लिया है।

शासन ने प्रकरण की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग के संबंध में चमोली और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

पर्यटन विभाग की अनु सचिव सोनिया भारती की ओर से दोनों जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर अजेंद्र अजय की शिकायत के संबंध में स्पष्ट आख्या शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अजेंद्र अजय ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर वर्ष 2023 के क्यूआर कोड प्रकरण की नए सिरे से जांच कराने तथा इसके लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है।

मंदिर परिसरों में लगाए गए थे QR कोड वाले बोर्ड-

अजेंद्र अजय ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2023 में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के दौरान दोनों मंदिर परिसरों में ऐसे बोर्ड लगाए गए थे, जिन पर क्यूआर कोड अंकित थे।

इन कोड को स्कैन कर श्रद्धालुओं से दान और चढ़ावा देने की अपील की जा रही थी।

मामला मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनने के बाद तत्कालीन बीकेटीसी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने इसकी छानबीन कराई थी।

शुरुआती जांच में संबंधित अधिकारियों ने इस मामले की जानकारी होने से इनकार किया था।

अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा-

तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय के निर्देश पर बीकेटीसी के तत्कालीन प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी की ओर से बदरीनाथ कोतवाली में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।

हालांकि, अजेंद्र अजय ने आरोप लगाया है कि बीकेटीसी के जिम्मेदार अधिकारियों और पुलिस की कथित सांठगांठ के चलते जांच सही दिशा में नहीं हुई।

पुलिस ने जांच के बाद किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं मिलने का उल्लेख करते हुए न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।

अदालत में बीकेटीसी का पक्ष नहीं पहुंचने पर भी उठाए सवाल-

अजेंद्र अजय ने अपने पत्र में न्यायिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा है कि मामले की सुनवाई के दौरान बीकेटीसी का कोई अधिकारी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ।

इसके चलते न्यायिक मजिस्ट्रेट, जोशीमठ की अदालत ने वादी पक्ष की अनुपस्थिति का उल्लेख करते हुए पुलिस की ओर से दाखिल अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी।

वहपूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष ने अपने पत्र के साथ विभिन्न तथ्यों और दस्तावेजों को संलग्न करते हुए पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है।

अब शासन की ओर से चमोली और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद वर्ष 2023 का यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

दोनों जिलाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर शासन आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लेगा।

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