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DehradunNews:-छोटे कार्यों की स्वीकृति जिलाधिकारी के स्तर पर ही मिलेगी

देहरादून –  सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने ली आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक , समीक्षा बैठक में कई जिलों के अधिकारियों ने कार्य करने में आने वाली व्यवहारिक दिक्कतों को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास के समक्ष उठाया। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंताओं ने कहा कि एचओडी स्तर पर आगणन स्वीकृत होने में काफी समय लगता है।

लिहाजा जिलाधिकारी के स्तर पर स्वीकृति मिल जाए तो कार्य और तेजी से किए जा सकते हैं। इस पर सचिव आपदा प्रबंधन ने कहा कि बड़े कार्य मुख्यालय स्तर पर स्वीकृत होंगे, लेकिन छोटे कार्यों की स्वीकृति जिलाधिकारी के स्तर पर ही मिल जाए, इसके लिए जल्द एक शासनादेश जारी किया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द छोटे कार्यों को संपादित किया जा सके।

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उन्होंने कहा कि जनपदों को जो पैसा दिया गया है, उसमें से 25 प्रतिशत तक जिलाधिकारी खर्च कर सकेंगे, इस संबंध में जल्द निर्देश भी जारी किए जाएंगे। इस पैसे से पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई अपने कार्य कर सकेंगे। इस दौरान सचिव सुमन ने कहा कि जिले अपने स्तर पर आगणन स्वीकृति की प्रक्रिया को आपस में बैठकर सरल बनाएं।

उन्होंने कहा कि मार्गों को सुचारू करने में लिखित अनुमति का इंतजार न करते हुए फोन व वर्चुअल माध्यम से अनुमति लेकर कार्य संपादित किए जाएं, ताकि मार्ग खोलने में अनावश्यक विलंब न हो।

उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर उनकी पूरी कोशिश होती है कि जल्द से जल्द प्रस्ताव स्वीकृत हो जाएं, लेकिन स्थानीय स्तर पर जो तकनीकी दिक्कतें आती हैं, उनका समाधान जनपदों को ही करना है।

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बैठक के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि  मुख्यमंत्री  द्वारा पुराने वर्षों की देनदारियों का जल्द से जल्द निपटान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि चाहे देनदारियां पीडब्ल्यूडी की हों या पीएमजीएसवाई की हों,

उन्हें जल्द से जल्द क्लियर किया जाए। उन्होंने कहा कि जेसीबी के ठेकेदारों की जो भी पुरानी देनदारियां हैं, उन्हें भी जल्द से जल्द क्लियर किया जाए ताकि उनका भरोसा विभाग पर बना रहे।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने सभी जनपदों को पीडीएनए पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंटद्ध के प्रस्ताव जल्द से जल्द भेजने को कहा ताकि क्षतिपूर्ति की कार्रवाई तेज की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव के लिए प्रारूप बना है।

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इसी के अनुरूप प्रस्ताव भेजा जाए। शासन में पीडीएनए के प्रस्ताव आएंगे, उसके बाद पीडीएनए किए जाने की अनुमति दी जाएगी। नुकसान को देखते हुए पीडीएनए किन क्षेत्रों में किया जाना है, इसका प्रस्ताव जनपदों को भेजना है, वह इसे जल्द भेजना सुनिश्चित करें।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि बैठक में विभिन्न विभागों ने जो जानकारी दी है, उसके अनुसार दो दिन में प्रदेश की 95 प्रतिशत सड़कें खोल ली जाएंगी। जो नहीं खुल पा रही हैं, वह ज्यादा क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन एक पखवाड़े के भीतर उन्हें भी खोल लिया जाएगा।

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