देहरादूनEconomic :- माल्टा को स्टेट फ्रूट का दर्जा मिले सिट्रस फल बदल सकते हैं पहाड़ की आर्थिक तंत्र का चेहरा Panchur Varta18 January 202618 January 202601 mins देहरादून 18 जनवरी 2026। माल्टा का महीना अभियान मे सिट्रस आर्थिकी पर दून लाइब्रेरी मे चर्चा आयोजित हुई। हरेला गाँव धाद की पहल पर आयोजित विमर्श मे आगाज फेडरेशन के जगदम्बा मैठानी, क़ृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव अजय डबराल, गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ तेजपाल बिष्ट ने अपना पक्ष रखा. स्वागत सम्बोधन रखते हुए हरेला उद्यान के संयोजक पवन बिष्ट ने बताया की पिछले तीन वर्षों से चल रहे। माल्टा का महीना अभियान ने इस वर्ष निर्णायक मोड़ लिया जब समाज से शासन तक इसकी धमक पहुंची. शासन से स्वीकारयता के साथ आम समाज मे भी अभियान 12 टन माल्टा खरीदने के लिए प्रेरित कर पाए. संवाद मे नर्सरी पर अपना पक्ष रखते जगदम्बा मैठानी ने कहा आगाज संस्था के संस्थापक जे पी मैठाणी ने. उन्होंने जनपद चमोली में नीम्बू प्रजाति के फलों की खेती के इतिहास में जानकारी दी। उन्होंने कहा की, वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती प्रमाणिक और उन्नत प्रजाति के स्वस्थ पौधों की उपलब्धता की है। क्यूंकि सरकारी और निजी स्तर पर के भी द्वारा संतरा प्रजाति के फल पौधों का जीन बैंक नहीं बनाया गया है। सरकार ने भी इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया है ! उन्होंने क्षेत्र पंचायत स्तर पर संतरा प्रजाति के फल पौधों जैसे – माल्टा, नारंगी , कागजी नीम्बू, बड़े नीम्बू – गल गल/हिल लेमन, चकोतरा की नर्सरी , खरीद और विपणन केंद्र के साथ साथ उन्नत नर्सरियों की स्थापना किये जाने पर जोर दिया ! संतरा प्रजाति के फल उद्यानों को कैसे इकोटूरिज्म से जोड़कर ग्राम पंचायत स्तर पर ही स्वरोजगार के केंद्र स्थापित किये जा सकते हैं इस बारे में जानकारी दी. डॉ तेज पाल बिष्ट ने कहा कि सिट्रस क्षेत्रफल एवं उत्पादन में 50–60% तक गिरावट आयी है। हमारे पास रोगमुक्त पौध सामग्री एवं वैज्ञानिक नर्सरी प्रणाली का अभाव हैँ इसके साथ MSP का लागत से कम होना, तथा सुनिश्चित खरीद का अभाव भी हैँ और प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन और ब्रांडिंग ढाँचे की कमी। जिसके लिए MSP को उत्पादन लागत से ऊपर (20–25 ₹/किग्रा) सुनिश्चित करना होगा. इसके साथ सरकारी/सहकारी खरीद तंत्र का विकास किसान समूह आधारित एकत्रीकरण और बड़े शहरी बाजारों से सीधा संपर्क करना होगा। मंडी समिति के सचिव अजय डबराल ने कहा माल्टा को अलग पहचान बनानी होगी क्यूंकि उसकी प्रतियोगिता कीनू और संतरे से है। इसलिए उसे अलग स्थान बनाना होगा पैकेजिंग पर काम करना होगा. उसे बेहतर और सुलभ बनाना होगा। माल्टा को छोटे एस एच जी के माध्यम से लेना होगा क्यूंकि इसका बड़ा वॉल्यूम अभी कम उपलब्ध हैँ माल्टा चुंकि सब जगह उत्पादित हो रहा हैँ इसे स्टेट फ्रूट का दर्जा दिया जाया इस अवसर पर जगमोहन सिंह रावत, देवेन्द्र कांडपाल, संचिता अग्रवाल, देवेन्द्र नेगी, हिमांशु आहूजा, संजीव कंडवाल, डी सी नौटियाल, तन्मय ममगाईं, जयवंती डिमरी, हिना, रोहन बिष्ट, आशा डोभाल, शिवेश द्विवेदी, गणेश उनियाल, पवन बिष्ट, नारायण सिंह रावत, बी एस रावत, मितेश नेगी, प्रमाद पसबोला, आलोक सरीन आदि उपस्थित रहे। ये भी पढ़ें: Quick Response Team:- कैबिनेट मंत्री केड़ा व मेयर थपलियाल ने क्विक रिस्पांस टीम की गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया Post navigation Previous: Action :- डोली पर मुकदमे की खबरें पूरी तरह भ्रामक एवं असत्य अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई- डीएमNext: Case Filed:- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर हुआ मुकदमा दर्ज Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ
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