प्रेमनगर क्षेत्र स्थित नंदा की चौकी में टोंस नदी पर हाल ही में तैयार किए गए पुल के पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त होने को लेकर निर्माण गुणवत्ता और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुल के पीछे भारी कटाव के कारण बड़ा गड्ढा बन गया है, जिससे पुल की मजबूती और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पुल के निर्माण पर करीब 16 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है।
ऐसे में पहली ही बरसात में पुल के आसपास इस तरह का नुकसान होना जनता के धन के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया।
कोई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो इसकी निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच आवश्यक है।
विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि 16 दिन पहले यातायात को खोलें गए इस पुल मियाद ज्यादा नहीं रहीं,
और 16 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल के पीछे बना यह बड़ा गड्ढा सरकारी निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की गहराई को दर्शाता है।
विपक्ष ने कहा कि यह तो मानसून की शुरुआत में सामने आया एक मामला है। बरसात का मौसम समाप्त होने तक राज्य में ऐसे और कितने निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त होते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
विपक्ष ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उत्तराखंड में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि जनता के टैक्स से बनने वाली सड़कें, पुल और अन्य निर्माण यदि पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त होने लगें, तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
मामले में अब पुल के निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, डिजाइन और तकनीकी मानकों की जांच की मांग उठ रही है।
साथ ही यह भी सवाल है कि निर्माण कार्य में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है,
तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, पुल के क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक कारणों और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े आरोपों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
ऐसे में संबंधित विभाग की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी वही लोक निर्माण विभाग केे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं।