रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रसिद्ध माँ वाराही धाम, देवीधुरा में आयोजित ऐतिहासिक बग्वाल मेले में इस वर्ष भी आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की उपस्थिति के बीच पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
मेले में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ वाराही के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक मेले में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सदियों पुरानी परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक बग्वाल मेला उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवीधुरा का बग्वाल मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,
बल्कि हमारी समृद्ध सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत,
प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उनके नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न मंदिरों, तीर्थस्थलों और धार्मिक परिसरों का सुनियोजित विकास किया जा रहा है,
जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक आस्था, पारंपरिक मेले, उत्सव और सांस्कृतिक धरोहरें राज्य की अमूल्य पहचान हैं।
इन्हें संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सरकार विशेष प्रयास कर रही है।
राज्य में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहन देकर स्थानीय संस्कृति को सशक्त बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को नई पहचान दिलाने के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।
इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
बग्वाल मेले के दौरान पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं ने माँ वाराही के दरबार में माथा टेककर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह ऐतिहासिक मेला एक बार फिर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और सनातन आस्था की जीवंत झलक प्रस्तुत करने में सफल रहा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया तथा प्रदेश सरकार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।