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Dehradun News-करें कर्णरोगान्तक प्राणायाम होगा यह फ़ायदा

देहरादून – इस प्राणायाम में दोनों नासिकाओं से (पूरक) हवा को मुंह में भरकर के फिर मुँह एवं दोनों नासिकाएँ बन्द कर पूरक की हुई वायु को बाहर धक्का देते हैं, जैसे कि श्वास को कानों से बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है।

जब वायु का कानों पर जो दबाव होता है तो कानों से स्वतः ही एक ध्वनि सी होती है।यही  आसन  की विधि है, श्वास को 4-5 बार ऊपर की ओर धक्का देकर फिर दोनों नासिकाओं में रेचक करें,रेचक से मतलब है सांस छोड़ना। इस प्रकार 2-3 बार करना पर्याप्त होगा।

इस आसन को करने से होते है ये लाभ कर्णरोगों में लाभदायक, विशेषतः बहरेपन को दूर करता है।

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