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DehradunNews:-बारिश ही है जो जंगलों को आग से बचा सकती हैं

बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं पर वनाग्नि ।


देहरादून – उत्तराखंड के जंगलों में लग रही आग  की घटनाओं में दिन प्रतिदिन लगातार तेजी से इजाफा हो रहा है, अभी तक उत्तराखंड में 1085 हेक्टेयर से ज्यादा वन संपदा को नुकसान पहुंचा है, तो वहीं 868 अलग-अलग वन अग्नि की घटनाओं के कारण तीन लोगों की मौत हुई है।

जबकि आग लगने के कारण जंगली जानवरों के लिए खतरा बना रहता है, हालात इतने बेकाबू है कि मुख्यमंत्री को दो बार वन अग्नि से निपटने के लिए आपात बैठक बुलानी पड़ी है।

लेकिन मुख्यमंत्री की शक्ति के बावजूद वन विभाग के पास इस आपदा से निपटने का कोई भी रास्ता नजर नहीं आता दिखाई दे रहा है,उत्तराखंड में एक नवंबर से अब तक वन अग्नि की घटनाओं का आंकड़ा 868 तक पहुंच गया है।

गढ़वाल हो या कुमाऊं दोनों ही जगह पर वन अग्नि की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं यहां तक की हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि आग अब रिहायशी इलाकों में भी घुस रही है, स्थानीय लोग अपने स्तर से आग को बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।

जबकि वन विभाग की सभी तैयार या बुरी तरह फेल हो गई है अब तक हुई वन अग्नि की घटनाओं में 1085 हेक्टेयर से ज्यादा वन संपदा को नुकसान पहुंचा है तो वहीं तीन लोगों की मौत की खबर के साथ पांच लोगों के घायल होने की भी सूचना है।

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वन अग्नि की बढ़ती घटनाओं पर पिछले दिनों हल्द्वानी और देहरादून में दो बैठकें भी हुई है जिसमे संबंधित सभी अधिकारियों से वन अग्नि से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों पर समीक्षा की गई थी हालांकि इन बैठकों के बाद भी वन अग्नि की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है।

शुक्रवार शाम को वन विभाग द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार पिछले 24 घंटे में वन अग्नि की 64 घटनाएं सामने आईं जिसमे 74.67 हेक्टेयर जंगलों को नुकसान पहुंचा है।

शनिवार को भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली में रहते हुए वन अग्नि की घटनाओं पर वन विभाग के उच्च अधिकारियों और प्रभावित सभी जिलों के जिला अधिकारियों के साथ एक बैठक की है जिसमें सभी अधिकारियों को वन अग्नि पर तत्काल एक्शन के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश में वन अग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग की सभी तैयारियां नाकाफी साबित हुई है वन विभाग की तरफ से जारी बयान में कहा जा रहा है कि इस साल बढ़ती वन अग्नि की घटनाओं में मैन मेड घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है।

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जिसको देखते हुए विभाग की तरफ से इस साल सबसे ज्यादा मामले दर्ज कराए गए हैं, वन प्रमुख धनंजय मोहन को बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि वन अग्नि की घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए मैन पावर को बढ़ाया जाए।

अपर मुख्य वन संरक्षक निशांत वर्मा का कहना है कि वन विभाग को हाल ही में 100 से ज्यादा कर्मचारी मिले हैं जिन्हें वन अग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए लगाया गया है उन्होंने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए क्विक रिस्पांस टीम को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है‌।

उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में वन अग्नि की घटनाएं कम हुई है वही निशांत वर्मा ने अल्मोड़ा में हुई तीन लिसा श्रमिकों की मौत को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया है उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिलाधिकारी को लिखित रिपोर्ट दी गई है।

उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण मानव जीवन तो प्रभावित हो ही रहा है लेकिन सबसे ज्यादा शिकार वह जानवर हो रहे हैं जो जमीन पर रेंगते हैं और जल्दी से एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा पाते।

वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिंह ने कहा कि वन अग्नि से सबसे ज्यादा नुकसान ऐसे जानवरों का होता है जो जमीन पर रहते हुए एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा पाते उन्होंने कहा ऐसे जानवरों के साथ-साथ जंगल में रहने वाले सभी जानवरों को बचना भी वन विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती है हालांकि इसके लिए बड़े स्तर पर प्रयास किया जा रहे हैं।

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समीर सिंह ने कहा कि जंगल के अंदर पानी की व्यवस्था की जा रही है और पानी की व्यवस्था की जाए और की मदद से सूखे पत्तों को भी साफ किया जा रहा है जिससे जंगलों में बढ़ती आग को रोका जा सके।

उत्तराखंड में हर दिन वनाग्नि की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है रोजाना वन विभाग के अधिकारी समीक्षा बैठक कर रहे हैं तो वहीं मुख्यमंत्री भी वनाग्नि को दो बड़ी बैठक कर चुके हैं इन सब के बावजूद वन अग्नि की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

जंगलों के आसपास रहने वाले लोग और जंगलों में रहने वाले जानवर अब विभाग से ज्यादा वर्षा पर निर्भर है क्योंकि विभाग के खोखलें दावों पर एकमात्र बारिश ही है जो जंगलों को आग की घटनाओं से बचा सकते हैं जबकि आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए स्थानीय लोगों को भी जिम्मेदार होना पड़ेगा जिससे घटनाओं को रोका जा सके।

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