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Mountaineering:- उत्तराखंड चार दशक बाद नंदा देवी पर्वत को पर्वतारोहण के लिए खोलने की तैयारी

देहरादून 17 जुलाई 2025।

उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है।

भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (आईएमएफ) ने नंदा देवी पर्वत को पर्वतारोहण के लिए फिर से खोलने का प्रस्ताव पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के समक्ष रखा है।

यह प्रस्ताव पर्यटन विभाग और वन विभाग के सहयोग से तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण के विस्तार को गति देना है।

नंदा देवी, भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी (7816 मीटर), जो चमोली जिले में गढ़वाल हिमालय में स्थित है, 1983 से पर्वतारोहण के लिए बंद है।

इस प्रतिबंध के पीछे पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण थे। हालांकि, अब चार दशक बाद, इस प्रतिबंध को हटाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

“पर्यटन और पर्वतारोहण को मिलेगा बढ़ावा”

पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल की अध्यक्षता में हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई।

आईएमएफ ने नंदा देवी शिखर के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्वतारोहण अभियानों को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मंजूरी देने की मांग की।

इसके अलावा, 6000 मीटर से कम ऊंचाई वाले पर्वत शिखरों जैसे बागेश्वर के बलजूरी (5922 मीटर), लस्पाधुरा (5913 मीटर), भनोल्टी (5645 मीटर) और उत्तरकाशी के रुद्रगयेरा (5819 मीटर) को ‘ओपन पीक’ श्रेणी में शामिल करने का सुझाव दिया गया।

“साहसिक पर्यटन के लिए व्यापक योजना”

उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य साहसिक पर्यटन को न केवल रोमांच तक सीमित रखना है, बल्कि इसे पर्यावरण संतुलन, सुरक्षा, और स्थानीय रोजगार से जोड़कर आर्थिक व सामाजिक प्रगति का माध्यम बनाना है।

बैठक में ट्रैकिंग रूट्स की वहन क्षमता का पुनर्मूल्यांकन, ट्रैकरों की संख्या पर नियंत्रण, और सुरक्षा व पारदर्शिता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

“गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान को सर्दियों में खोलने की मांग”

पर्यटन विभाग ने वन विभाग से गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान को सर्दियों (अक्टूबर से मार्च) के दौरान खुला रखने का अनुरोध किया है, ताकि स्नो लेपर्ड आधारित ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल सके।

यह कदम साहसिक पर्यटन को और आकर्षक बनाने में मदद करेगा।

“नंदा देवी: सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व”

नंदा देवी पर्वत न केवल एक प्राकृतिक चमत्कार है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।

स्थानीय लोककथाओं में इसे हिमालय की पुत्री और माता पार्वती का रूप माना जाता है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है, जो जैव-विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

नंदा देवी को पर्वतारोहण के लिए खोलने का प्रस्ताव जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। इस कदम से न केवल साहसिक पर्यटकों को एक नया गंतव्य मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के लिए सख्त दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

यह पहल उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन के वैश्विक नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है

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