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Appeal:-हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर कृषि मंत्री जोशी ने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधारोपण और संरक्षण की अपील

देहरादून 15 जुलाई 2026।

प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखण्ड की समृद्ध पर्यावरणीय,

एवं सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर अपने कैंप कार्यालय में उद्यान विभाग द्वारा आयोजित निःशुल्क फलदार पौधा वितरण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों एवं आम नागरिकों ने भाग लिया।

इस दौरान आम, लीची, अमरूद, नींबू, अनार, कटहल सहित विभिन्न फलदार, सगंध एवं औषधीय प्रजातियों के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया।

इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि,

हरेला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।

केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का संरक्षण और संवर्धन भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पिछले वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर उद्यान विभाग द्वारा 9 लाख से अधिक फलदार पौधों का रोपण किया गया था।

इस वर्ष इस अभियान का विस्तार करते हुए 10 लाख फलदार पौधों, 50 हजार चाय के पौधों,

तथा 50 हजार रेशम विभाग के पौधों सहित कुल 11 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ आज देहरादून जनपद से किया गया।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि फलदार पौधों को प्राथमिकता देने का उद्देश्य यह है कि,

लोग फलों के प्रति स्वाभाविक लगाव के कारण इन पौधों की नियमित देखभाल करते हैं,

जिससे पौधों के जीवित रहने की संभावना भी बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को भविष्य में आर्थिक एवं पोषण संबंधी लाभ भी प्राप्त होगा।

कृषि मंत्री ने प्रदेशवासियों से हरेला पर्व पर अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनका संरक्षण करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और स्वच्छ उत्तराखण्ड के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैंट विधायक सविता कपूर, सरकार में दायित्वधारी ज्योति कोटिया, निदेशक उद्यान डॉ आरके सिंह,

निदेशक कृषि दिनेश कुमार, मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, मंडल अध्यक्ष राजीव गुरुंग सहित अन्य अधिकारी एवं कृषक उपस्थित रहे।

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