2027 विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले भाजपा हाईकमान ने उत्तराखंड में बड़ा फेरबदल कर दिया है
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कई राज्यों के प्रभारी बदले हैं, जिसमें उत्तराखंड से मौजूदा प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को हटाकर वरिष्ठ नेता और संघ के करीबी राम माधव को प्रदेश प्रभारी की कमान सौंपी गई है।
उनके साथ अरविंद मेनन और सांसद बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी बनाया गया है।
2027 से पहले इस बदलाव के सियासी मायने क्या हैं?
. हैट्रिक का टारगेट और संगठन में नई ऊर्जा भाजपा उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के मिशन पर है।
दुष्यंत गौतम लंबे समय से प्रभारी थे, अब पार्टी ने चुनावी साल से पहले चेहरे बदलकर संगठन में नया जोश फूंकने की कोशिश की है। इसे 2027 की तैयारी का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
. राम माधव की वापसी से संघ-संगठन साधने की कोशिश राम माधव आरएसएस पृष्ठभूमि से आते हैं और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
उन्हें जम्मू-कश्मीर से लेकर नॉर्थ-ईस्ट तक के रणनीतिकार के तौर पर जाना जाता है।
उनकी नियुक्ति को संगठन में अनुशासन और वैचारिक धार को तेज करने के तौर पर देखा जा रहा है।
. अरविंद मेनन को क्यों लाया गया ? मेनन उत्तराखंड के लिए नए नहीं हैं, वह पहले प्रदेश के संगठन महामंत्री रह चुके हैं। बूथ स्तर तक उनकी पकड़ मानी जाती है।
ऐसे में उन्हें सह प्रभारी बनाकर पुराने कार्यकर्ताओं को साधने और गुटबाजी को कंट्रोल करने का संदेश दिया गया है।
. बांसुरी स्वराज के जरिए महिला-युवा वोट पर नजर दिल्ली से सांसद और सुप्रीम कोर्ट की वकील बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी बनाना महिला और शहरी युवा मतदाताओं को साधने की रणनीति है।
साथ ही सुषमा स्वराज की विरासत से जोड़कर एक भावनात्मक अपील भी।
कुल मिलाकर 2027 से पहले भाजपा ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव सिर्फ सरकार के काम पर नहीं, बल्कि संगठन की नई केमिस्ट्री पर लड़ा जाएगा।
राम माधव के कंधे पर अब हैट्रिक दिलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।