मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम से शुक्रवार को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर विस्तृत चर्चा की।
इस दौरान कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड को भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा।
उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में थोक में Form-7 आपत्तियां दाखिल कर वैध मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
पार्टी ने Manual on Electoral Rolls, March 2023 में निर्धारित प्रक्रिया का हवाला देते हुए इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
किच्छा विधानसभा में लगभग 50 पोलिंग स्टेशनों पर 10 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी आपत्तियां दर्ज होने,
तथा केवल चार व्यक्तियों द्वारा 100 से अधिक आपत्तियां दाखिल किए जाने का मामला ज्ञापन में उठाया गया।
कांग्रेस के अनुसार, एक व्यक्ति राजेश तिवारी के नाम से लगभग 6,410 आपत्तियां दाखिल होने की जानकारी मिली है।
कांग्रेस ने पीरान कलियर में विधायक फुरकान अहमद के नाम के विरुद्ध ऐसी आपत्ति दर्ज होने का मामला भी उठाया,
जिसे संबंधित व्यक्ति ने शपथपत्र देकर दाखिल करने से इनकार किया है।
गदरपुर में दिवंगत महिला के नाम से आपत्ति तथा न्यायिक हिरासत में बंद व्यक्तियों के नाम से आपत्तियां दर्ज होने की शिकायतों की भी जांच की मांग की गई।
प्रदेश कांग्रेस ने ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जिलों की कई विधानसभा सीटों में Form-7 आपत्तियों के असामान्य पैटर्न की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
साथ ही ऊधमसिंह नगर में DSE/PSE के आधार पर लगभग 1,02,793 मतदाताओं के नाम प्रभावित किए जाने की जानकारी पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें-
विवादित Form-7 और DSE/PSE मामलों में अंतिम नाम हटाने की कार्रवाई जांच पूरी होने तक रोकी जाए।
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए।
Form-7 के आवेदन, हस्ताक्षर, डिजिटल ट्रेल, CCTV और सत्यापन रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को Form-7 और DSE/PSE मामलों का बूथ वार पारदर्शी डेटा उपलब्ध कराया जाए।
किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस एवं अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाना उसके मताधिकार पर सीधा प्रहार है।
निर्वाचन आयोग से मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराकर मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि,
एसआईआर प्रक्रिया पूर्ण रुप से नियमनुसार संपादित की जा रही है।
उन्होंने बताया प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिन जनपदों में दावे एवं आपत्तियां अधिक संख्या में प्राप्त हुई हैं।
वहां 9 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की पर्यवेक्षण अधिकारी के तौर पर अतरिक्त तैनाती की गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में मंडल आयुक्त गढ़वाल एवं कुमाऊं को भी मतदाता सूची के पर्यवेक्षक के रुप में कार्य सौंपा गया गया है।
उन्होंने बताया कि सभी जनपदों को राजनैतिक दलों से नियमित बैठक करनें के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महासचिव संगठन राजेंद्र सिंह भंडारी, प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व विधायक मनोज रावत,
सुजाता पॉल, प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह, महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह गोगी शामिल रहे।