बिहार के नालंदा जिले के जिलाधिकारी कार्यालय की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसने लोगों में काफी आक्रोश पैदा किया है।
तस्वीर में दिखाया गया है कि एक अधिकारी (जो जिलाधिकारी कार्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है) लांड्री में धुली साफ-सुथरी सफेद तौलिया बिछाकर हजारों रुपये की महंगी आलीशान कुर्सी पर आराम से बैठे हैं।
वहीं, महज पांच फीट की दूरी पर एक आम नागरिक (फरियादी) एक सस्ती, गंदी और फटी-पुरानी प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा हुआ है।
यह फोटो मुख्य रूप से फेसबुक और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स पर शेयर की जा रही है,
जहां कैप्शन में इसे “जनता के सेवक” की असलियत के रूप में पेश किया जा रहा है।
लोग इसे श्रम और आम आदमी के अपमान का प्रतीक मान रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि:
अधिकारी खुद को “पब्लिक सर्वेंट” कहते हैं, लेकिन व्यवहार में जनता को नीचा दिखाते हैं।
सरकारी कार्यालयों में यह दोहरी व्यवस्था आम है, जहां अधिकारी लग्जरी में रहते हैं और आम लोग तिरस्कार सहते हैं।
यह तस्वीर समाज में बढ़ती असमानता और श्रम का सम्मान न करने की प्रवृत्ति को उजागर करती है।
हालांकि, इस तस्वीर की आधिकारिक पुष्टि या जांच अभी तक सामने नहीं आई है।
न तो कोई सरकारी बयान आया है और न ही जिलाधिकारी या प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी हुआ है।
यह घटना सोशल मीडिया पर काफी पुरानी पोस्ट्स (फेसबुक से) से जुड़ी लग रही है, लेकिन हाल के दिनों में फिर से वायरल हो रही है।
ऐसे मामलों में अक्सर लोग मांग करते हैं कि प्रशासन जांच करे, दोषी पर कार्रवाई हो और कार्यालयों में सभी के लिए समान कुर्सियां/सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
यदि आपके पास इस तस्वीर का मूल स्रोत या कोई अतिरिक्त डिटेल है, तो और सटीक जानकारी दी जा सकती है।
यह घटना सरकारी कार्यालयों में सुधार की जरूरत को रेखांकित करती है।