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Health News :- दांत और मसूड़ों की बीमारी  साइलेंट खतरा जो दांतों को चुपके से खा जाता है

देहरादून 23 अप्रैल 2026।

दांत और मसूड़ों की बीमारी जिंजिवाइटिस से शुरू होती है  मसूड़े लाल, सूजे हुए और ब्रश करते वक्त खून आने लगता है।

इसको अनदेखी की तो ये पेरियोडॉन्टाइटिस बन जाती है, जहां मसूड़े पीछे हटते हैं, दांत हिलने लगते हैं और आखिर में निकल भी सकते हैं।

मुख्य वजह? दांतों पर प्लाक और टार्टर का जमा होना, खराब ब्रशिंग और फ्लॉसिंग न करना।

बचाव आसान है  दिन में दो बार ब्रश करें, रोज फ्लॉस करें और छह महीने में एक बार डेंटिस्ट से चेकअप कराएं।

शुरुआती स्टेज में ये पूरी तरह ठीक हो जाता है, बस ध्यान देना शुरू कर दो।मसूड़ों की बीमारी क्या है?

तीन स्टेज में समझें

• मसूड़े की सूजन (Gingivitis): शुरुआती स्टेज। मसूड़े लाल, सूजे हुए, ब्रश करते वक्त खून आना। इस स्टेज पर इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकती है।

• पेरियोडोंटाइटिस: इलाज न हो तो बैक्टीरिया दांत को सहारा देने वाली हड्डी और टिश्यू को नुकसान पहुंचाते हैं। मसूड़े दांतों से अलग होने लगते हैं, दांत हिलने लगते हैं।

• एडवांस पेरियोडोंटाइटिस: जबड़े की हड्डी कमजोर, दांत गिरना, चबाने में दिक्कत।

मुख्य कारण: खराब ओरल हाइजीन से जमा प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया शुगर को एसिड में बदलते हैं,

जो दांत-मसूड़े दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा धूम्रपान, तंबाकू, डायबिटीज, विटामिन-C की कमी,

हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ दवाएं भी जोखिम बढ़ाती हैं।

मुख्य कारण: खराब ओरल हाइजीन से जमा प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया शुगर को एसिड में बदलते हैं,

जो दांत-मसूड़े दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा धूम्रपान, तंबाकू, डायबिटीज, विटामिन-C की कमी, हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ दवाएं भी जोखिम बढ़ाती हैं।

सिर्फ दांत नहीं गिरते, शरीर में ये 7 बड़ी बीमारियां हो सकती हैं

मसूड़ों की सूजन से निकलने वाले बैक्टीरिया और टॉक्सिन खून के जरिए पूरे शरीर में फैल सकते हैं।

शरीर का अंग/सिस्टम मसूड़ों की बीमारी से कैसे जुड़ाव।दिल और खून की नलियां बैक्टीरिया धमनियों में प्लाक बनाने में मदद करते हैं।

डायबिटी- जहाई शुगर से शरीर बैक्टीरिया से लड़ नहीं पाता, मसूड़ों की बीमारी बिगड़ती है। उल्टा, मसूड़ों की बीमारी शुगर कंट्रोल भी बिगाड़ती है।

जोड़ों का दर्द – रूमेटॉइड आर्थराइटिस RA के 65% मरीजों में मसूड़ों की बीमारी मिली, जबकि सामान्य लोगों में 28%।फेफड़े/सांस की नली मुंह के बैक्टीरिया सांस के साथ फेफड़ों में जा सकते हैं।

किडनी-क्रोनिक सूजन और बैक्टीरिया का असर।

गर्भावस्था सूजन और बैक्टीरिया का असर पूरे शरीर पर।

पाचन व कैंसर कमजोर दांत-मसूड़े चबाने में दिक्कत देते हैं; तंबाकू-गुटखे से खतरा और बढ़ता है।

खराब दांत-मसूड़े आत्म-सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य भी घटाते हैं।

चेतावनी वाले लक्षण: इन्हें न करें नजरअंदाज

• मसूड़ों से खून आना, सूजन या लाल होना • लगातार बदबूदार सांस

• दांतों का संवेदनशील होना, गर्म-ठंडा लगना

• मसूड़े पीछे हटना, दांत लंबे दिखना

• खाना चबाते समय दर्द

• दांतों का हिलना।

बचाव और इलाज:

डॉक्टर की 5 जरूरी सलाह

1. दिन में 2 बार ब्रश + फ्लॉस: प्लाक को जमने से पहले हटाएं। प्लाक ही सड़न और सूजन की जड़ है।

2. 6 महीने में डेंटल चेकअप: शुरुआती स्टेज Gingivitis पूरी तरह रिवर्स हो सकती है।

3. तंबाकू-शराब से दूरी: धूम्रपान करने वालों में टार जमा होता है, पेरियोडोंटल बीमारी का खतरा ज्यादा। गुटखा-तंबाकू मुंह के कैंसर तक ले जा सकता है।

4. डायबिटीज कंट्रोल करें: शुगर काबू में रखने से मसूड़ों का इन्फेक्शन कम होगा।

5. संतुलित डाइट: विटामिन-C की कमी मसूड़ों की बीमारी बढ़ाती है।

याद रखें: मसूड़े एक ढाल की तरह हैं जो दांत-जबड़े को बैक्टीरिया, एसिड से बचाते हैं। ढाल कमजोर हुई तो पूरा किला खतरे में।

स्कूल जाने वाले 70% बच्चों के दांतों में सड़न और 90% वयस्क मसूड़ों की बीमारी से जूझ रहे हैं।

इसलिए मुंह की सफाई ‘कॉस्मेटिक’ नहीं, ‘लाइफ सेविंग’ आदत है।अगर आपको ऊपर बताए लक्षण दिखें तो डेंटिस्ट से तुरंत मिलें।

क्योंकि जैसा एक्सपर्ट कहते हैं — ‘खराब दांत और कमजोर मसूड़े से हाई बीपी, किडनी, दिल की बीमारी और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं’।

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