नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार साहिल की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई।
साहिल के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर राहुल गांधी ने संसद मार्ग स्थित डीसीपी कार्यालय में करीब 7 घंटे 30 मिनट तक धरना दिया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की।
जानकारी के अनुसार, साहिल और उसके परिजनों का आरोप था कि उनके साथ हुई घटना के बावजूद पुलिस उनकी शिकायत दर्ज करने में टालमटोल कर रही थी।
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी थी। मामला राहुल गांधी तक पहुंचा तो उन्होंने स्वयं पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरी जानकारी ली और न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
इसके बाद राहुल गांधी संसद मार्ग स्थित डीसीपी कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से मुलाकात कर तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
जब कई घंटों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे।
धरने के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी नागरिक को न्याय पाने के लिए घंटों इंतजार करने या राजनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पीड़ित की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई की जाती तो उन्हें धरना देने की नौबत नहीं आती।
राहुल गांधी ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
करीब 7 घंटे 30 मिनट तक चले धरने और लगातार दबाव के बाद पुलिस अधिकारियों ने साहिल की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने की पुष्टि की।
एफआईआर दर्ज होने की सूचना मिलते ही धरना समाप्त कर दिया गया। इस दौरान डीसीपी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे और न्याय की मांग को लेकर नारेबाजी भी की।
एफआईआर दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने इसे पीड़ित परिवार की पहली जीत बताते हुए कहा कि यह सिर्फ साहिल का मामला नहीं,
बल्कि हर उस नागरिक की लड़ाई है जिसे न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेगी।
उधर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब इस पूरे मामले पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
तथा लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक शिकायत दर्ज कराने के लिए इतने लंबे धरने की आवश्यकता क्यों पड़ी।