युवाओं को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान,
रानीपोखरी (ऋषिकेश) में विशेष तंबाकू जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को तंबाकू से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों की जानकारी दी गई तथा तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान मनोवैज्ञानिक डॉ. अनुराधा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों,
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों तथा इससे बचाव के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग,
फेफड़ों की गंभीर बीमारियों और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण बनता है।
इस अवसर पर आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और तंबाकू से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने सवाल पूछे।
विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों के उत्तर देकर उन्हें सही जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के तहत तंबाकू के दुष्प्रभावों को दर्शाने वाली पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया,
जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से नशा मुक्ति और स्वास्थ्य संरक्षण का संदेश दिया।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जबकि प्रथम,
द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को तंबाकू मुक्त रहने की शपथ दिलाई गई।
आयोजकों ने कहा कि युवाओं में जागरूकता बढ़ाकर ही तंबाकू के बढ़ते प्रचलन पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
संस्थान प्रशासन ने बताया कि कॉलेज परिसर में भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी तंबाकू नियंत्रण संबंधी सभी दिशा-निर्देशों और मानकों का पूर्ण पालन किया जा रहा है।
इसी उत्कृष्ट कार्य के लिए संस्थान को पूर्व में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।
कार्यक्रम में संस्थान के प्रधानाचार्य अनिल कुमार सिंह, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की सलाहकार अर्चना उनियाल,
सामाजिक कार्यकर्ता रेखा अभियान सहित लगभग 200 विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों ने सहभागिता की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम युवाओं को नशे से दूर रखने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।