उत्तराखंड में बढ़ते महिला अपराधों के खिलाफ महिला कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया हुए मंगलवार को महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से. नि.) से मुलाकात की।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में महिलाओं और बच्चियों पर बढ़ते अत्याचारों और अपराधों से संबंधित विभिन्न मामलों की ओर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया और एक ज्ञापन सौंपकर इन पर प्रभावी रोकथाम की मांग की।
ज्योति रौतेला ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तराखंड में महिला अपराधों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए।
बताया कि इस अवधि में बलात्कार की 1822 घटनाएं दर्ज की गईं, 318 अज्ञात महिलाओं के शव मिले, जिनमें से केवल 87 की शिनाख्त हो पाई, और 10,500 महिलाएं लापता हुईं,
जिनमें से 767 अभी भी लापता हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने देवभूमि की गरिमा और महिला सम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए मांग की कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।
ज्योति रौतेला ने कहा, “महिला कांग्रेस राज्यपाल के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचा रही है, लेकिन सरकार आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस बल का सहारा ले रही है।
हमारी मांग है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों में दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और अपराधियों को संरक्षण देने की नीति पर रोक लगे।”
इस मुलाकात में महिला कांग्रेस की ओर से प्रदेश उपाध्यक्ष नजमा खान, चन्द्रकला नेगी, प्रदेश महासचिव पुष्पा पंवार, पूनम सिंह, और अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।
महिला कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वे महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के प्रति सरकार को लगातार सचेत करती रहेंगी और इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेंगी।
इस प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से महिला कांग्रेस ने सरकार से महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने और अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।