उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी ने मध्य रात्रि में प्रांतीय भार निस्तारण केंद्र (एसएलडीसी) का औचक निरीक्षण कर विद्युत तंत्र की कार्यप्रणाली का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्युत आपूर्ति, लोड प्रबंधन तथा ग्रिड संचालन से संबंधित विभिन्न व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान 400 केवी काशीपुर-नहटौर विद्युत लाइन में बार-बार ट्रिपिंग की समस्या सामने आई।
इस पर प्रबंध निदेशक ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा समस्या के कारणों और उसके समाधान के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाए जाएं।
इस दौरान प्रबंध निदेशक ने बिजली मांग एवं उपलब्धता के पूर्वानुमान से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।
समीक्षा में पाया गया कि मार्काडोस कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे पूर्वानुमान और वास्तविक स्थिति के बीच काफी अंतर है, जिससे विद्युत प्रबंधन प्रभावित हो रहा है।
इस पर प्रबंध निदेशक ने कंपनी के प्रति गहरी अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए पूर्वानुमान प्रणाली में तत्काल सुधार लाने की सख्त चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में गलत पूर्वानुमान स्वीकार्य नहीं है और इससे विद्युत तंत्र की कार्यकुशलता प्रभावित होती है।
प्रबंध निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को मार्काडोस कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
नोटिस में कंपनी से यह स्पष्ट करने को कहा जाएगा कि उसके विरुद्ध अनुबंध निरस्त करने तथा ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
यूपीसीएल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि विद्युत उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है,
तथा लापरवाही या कार्य में कमी बरतने वाली एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
यूपीसीएल प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी ने मध्य रात्रि में किया औचक निरीक्षण।
प्रांतीय भार निस्तारण केंद्र में विद्युत व्यवस्था की समीक्षा।
400 केवी काशीपुर-नहटौर लाइन में ट्रिपिंग की समस्या पर लिया तत्काल संज्ञान।
मार्काडोस कंपनी के पूर्वानुमान और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया।
कंपनी को सख्त चेतावनी, कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश।
अनुबंध निरस्तीकरण और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई पर भी विचार।