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Faith :- दो माह में 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए आदि कैलाश-ओम पर्वत के दर्शन

पिथौरागढ़ 03 जुलाई 2026।

हिमालय की गोद में बसा आदि कैलाश जहाँ आस्था, अध्यात्म और प्रकृति एक साथ साकार होते हैं।

कभी यह यात्रा केवल चुनिंदा श्रद्धालुओं तक सीमित थी, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की डबल इंजन की सरकार के समन्वित प्रयासों से,

इसे सीमांत उत्तराखंड के विकास और धार्मिक पर्यटन की नई पहचान बना दिया है।

इस बदलाव की कहानी केवल दावों में नहीं, बल्कि आँकड़ों में भी स्पष्ट दिखाई देती है।

वर्ष 2025 के पूरे यात्रा सत्र में जहाँ 36,456 श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए थे,

वहीं वर्ष 2026 में केवल दो माह के भीतर ही 52,250 से अधिक श्रद्धालु इस दिव्य धाम तक पहुँच चुके हैं।

यह धार्मिक पर्यटन में आई अभूतपूर्व वृद्धि का सशक्त प्रमाण है।

इस परिवर्तन की नींव वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक आदि कैलाश दौरे से और मजबूत हुई।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर इस आध्यात्मिक धाम को नई पहचान दिलाई, जिसके बाद राज्य सरकार ने सड़क, कनेक्टिविटी,

ऑनलाइन इनर लाइन परमिट, गेस्ट हाउस, होमस्टे तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर तेजी से कार्य किया।

आज देशभर से आने वाले श्रद्धालु बेहतर सड़क व्यवस्था, सुगम यात्रा, आवासीय सुविधाओं और स्थानीय होमस्टे की खुलकर सराहना कर रहे हैं।

यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता ने सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूँक दी है।

पिछले तीन वर्षों में 284 नए टैक्सी वाहन (93 कैम्पर और 191 मैक्स) पंजीकृत हुए हैं, जिससे मोटर मार्ग के किनारे बसे गांवों के स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है।

धारचूला से आदि कैलाश और ओम पर्वत मार्ग पर बसे लगभग 10 हजार स्थानीय लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस यात्रा से जुड़ चुकी है।

रिवर्स पलायन की तस्वीर भी बदलती दिखाई दे रही है। जिन गांवों—बूँदी, कुटी, गुंजी, नाबी और नपल्च्यू—में कभी पुराने और खाली पड़े मकान दिखाई देते थे,

वहीं अब 70 से 80 स्थानीय परिवारों ने अपने घरों का पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कर उन्हें पर्यटन विभाग के अंतर्गत होमस्टे के रूप में पंजीकृत कराया है।

इतना ही नहीं, वर्ष 2026 में अब तक 47 नए होमस्टे पंजीकृत हुए हैं, जबकि 827 होमस्टे पहले से संचालित हैं।

इससे स्थानीय लोगों को अपने गांव में ही सम्मानजनक स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर भी उल्लेखनीय बदलाव हुए हैं। धारचूला से आदि कैलाश तक लगभग 115 किलोमीटर सड़क का डामरीकरण किया जा चुका है।

तथा इस मार्ग पर 10 नए पुलों का निर्माण हुआ है। इससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनी है।

आदि कैलाश आज केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में विकास, पर्यटन और रिवर्स पलायन का सफल मॉडल बनकर उभरा है।

जहाँ कभी कुछ हजार श्रद्धालुओं का पहुँचना भी बड़ी उपलब्धि माना जाता था,

वहीं आज केवल दो माह में ही 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का यहाँ पहुँचना इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड का यह दिव्य धाम राष्ट्रीय आस्था के मानचित्र पर तेजी से अपनी सशक्त पहचान बना चुका है।

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