विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ की समृद्ध विरासत व परंपराओं से रूबरू हुए देशभर से आए माय भारत युवा स्वयंसेवक।
चमोली जनपद के माणा, बामनी, गजकोटी में मॉडल ग्राम सभा का आयोजन किया गया,
देशभर के माय भारत स्वयंसेवकों ने सीमांत गांवों की साझी सांस्कृतिक विरासत और एक भारत श्रेष्ठ भारत की देखी झलक
पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती गांव नाबी पहुंचने पर ‘माय भारत’ के पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, पंजाब और कर्नाटक के प्रतिभागियों का पारंपरिक अंदाज में हुआ स्वागत
उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम के निकट भैरवघाटी में युवा स्वयंसेवकों ने सफाई अभियान चलाया, युवा स्वयंसेवकों ने भैरवघाटी के स्वच्छ वातावरण में किया योग
यह एक अग्रणी युवा नेतृत्व वाली पहल है जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर भागीदारी को सुदृढ़ करना,
राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना और भारत के सीमावर्ती गांवों में सतत विकास को प्रोत्साहित करना है
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयंसेवकों को लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में दो चरणों में तैनात किया जा रहा है
प्रथम चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गहन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं,
जबकि शेष 250 स्वयंसेवक इस महीने के अंत में 50 गांवों में द्वितीय चरण की गतिविधियों में शामिल होंगे
इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ का प्रचार-प्रसार है, जो एक राष्ट्रव्यापी अभियान है और ज़िम्मेदार नागरिकता एवं टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देता है
रविवार को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग ने मेरा युवा भारत के माध्यम से विकसित जीवंत ग्राम कार्यक्रम (वीवीवीपी) 2026 के पहले चरण में उत्तराखंड के चमोली,
उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ की समृद्ध विरासत व परंपराओं से रूबरू हुए देशभर के माय भारत युवा स्वयंसेवक।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत चमोली जनपद के माणा, बामनी, गजकोटी में मॉडल ग्राम सभा का आयोजन किया गया।
जिसमें देशभर से पहुंचे माय भारत स्वयंसेवकों ने सीमांत गांवों की साझी सांस्कृतिक विरासत और एक भारत श्रेष्ठ भारत की तस्वीर देखी।
पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती गांव नाबी पहुंचने पर ‘माय भारत’ के पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, पंजाब और कर्नाटक के प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
इस संवाद कार्यक्रम में नाभी गांव की ग्राम प्रधान कुमारी छभिता नबियाल, राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) एवं सदस्य, जनजातीय सलाहकार परिषद अशोक सिंह नबियाल।
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता धीरज सिंह नबियाल और व्यास ऋषि मेला समिति के अध्यक्ष मदन सिंह नबियाल उपस्थिति रहे।
प्रतिभागियों के साथ एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें भारत के अग्रणी सीमावर्ती गांवों में से एक नाबी के ऐतिहासिक महत्व,
सांस्कृतिक विरासत और रणनीतिक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया।
वक्ताओं ने गांव की परंपराओं, सामुदायिक जीवन और इस क्षेत्र की अनूठी पहचान को बनाए रखने में इसकी भूमिका के बारे में अपने विचार साझा किए।
इस संवाद ने प्रतिभागियों को सीमावर्ती समुदायों की आकांक्षाओं, चुनौतियों और अवसरों की गहरी समझ प्रदान की,
जिसने एक जीवंत और विकसित सीमावर्ती क्षेत्र के दृष्टिकोण को और मजबूत किया।
उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम के निकट भैरवघाटी में आईटीबीपी और माय युवा भारत के समन्वय से युवा स्वयंसेवकों ने सफाई अभियान चलाया। युवा स्वयंसेवकों ने भैरवघाटी के स्वच्छ वातावरण में योग किया।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुल 500 ‘एमवाई भारत’ स्वयंसेवकों का चयन किया गया है।
इनका चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया, जिसमें 3 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया था।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयंसेवकों को लद्दाख,
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में दो चरणों में तैनात किया जा रहा है।
प्रथम चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गहन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं, जबकि शेष 250 स्वयंसेवक इस महीने के अंत में 50 गांवों में द्वितीय चरण की गतिविधियों में शामिल होंगे।
यह कार्यक्रम युवा नागरिकों को सीमावर्ती गांवों में रहने और स्थानीय समुदायों के साथ सीधे जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।
गांववासियों, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों के साथ परस्पर बातचीत के माध्यम से,
प्रतिभागी भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं, सांस्कृतिक विरासत,
विकासात्मक आकांक्षाओं और रणनीतिक महत्व से प्रत्यक्ष रूप से परिचित होंगे।
सात दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक जीवन, शासन,
सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन, ग्राम विकास योजना, स्वयंसेवा और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयगत क्षेत्रों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है।
स्वयंसेवक घरेलू सर्वेक्षण करेंगे, ग्राम सभा की गतिविधियों में भाग लेंगे, स्वच्छता और पर्यावरण अभियानों में योगदान देंगे और गांवों में विकास के अवसरों की पहचान करने में सहायता करेंगे।