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श्रीनगर 20 फरवरी 2026।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित प्रसिद्ध धारी देवी मंदिर के निकट अलकनंदा नदी में एक नाव दुर्घटना की घटना सामने आई है।
यह हादसा लगभग 5 दिन पहले (लगभग 15 फरवरी 2026) हुआ, जिसमें दो नावों की आपस में जोरदार टक्कर हो गई।
सौभाग्य से, इस घटना में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ और एक बड़ा हादसा टल गया।प्रारंभिक जांच के अनुसार,
नदी के तेज बहाव और नाव संचालन में समन्वय की कमी इस दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है।
घटना धारी देवी क्षेत्र में अलकनंदा नदी के बीच हुई, जहां दो नावें (संभवतः एडवेंचर या सामान्य नावें) एक-दूसरे से टकरा गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि एक नाव कुछ समय तक नदी के बीच में गोल-गोल घूमती रही।
टक्कर के तुरंत बाद, प्रभावित नाव के चालक ने अपनी जान बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी।
पास में मौजूद एक अन्य नाव ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, जिससे स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।
स्थानीय लोगों और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। घटना में शामिल नावें संभवतः ऑपरेटर-ओनली थीं,
यानी उनमें कोई यात्री नहीं थे, जिससे हताहतों की संख्या शून्य रही।
अलकनंदा नदी का यह क्षेत्र अपनी तेज धारा और पहाड़ी इलाके के कारण जोखिम भरा माना जाता है, विशेषकर मानसून या साहसिक गतिविधियों के दौरान।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर की आवाज काफी तेज थी और एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे नाव डूब जाएगी।
एक गवाह ने कहा, “टक्कर के बाद नाव अनियंत्रित होकर घूमने लगी, लेकिन चालक की सतर्कता से वह बच गया।
पास की नाव ने तुरंत मदद की, वरना स्थिति बिगड़ सकती थी। इन बयानों से स्पष्ट है कि स्थानीय लोगों की सजगता ने हादसे को गंभीर होने से रोका।
घटना के बाद तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया। स्थानीय निवासियों और पास की नावों ने मिलकर चालक को सुरक्षित निकाला।
कोई आधिकारिक बचाव टीम का उल्लेख नहीं है, लेकिन प्रशासन को सूचित किया गया।
सौभाग्य से, कोई चोट या मौत नहीं हुई, जिससे यह एक चेतावनी वाली घटना बनकर रह गई।
धारी देवी मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर के पास अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है, जो चार धाम यात्रा के मार्ग पर एक महत्वपूर्ण स्थल है।
यह मंदिर देवी काली के रूप में पूजा जाता है और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह केदारनाथ मंदिर का संरक्षक माना जाता है।
नदी में साहसिक गतिविधियां जैसे राफ्टिंग और बोटिंग आम हैं, लेकिन तेज बहाव के कारण दुर्घटनाओं का खतरा रहता है।
2013 की केदारनाथ आपदा के बाद इस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को सख्त किया गया था, लेकिन हाल की घटनाएं सवाल उठाती हैं।
प्रशासन से सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने और नदी में सतर्कता बढ़ाने की मांग की जा रही है।
स्थानीय अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नाव संचालकों को प्रशिक्षण और समन्वय पर जोर दिया जा सकता है।
यात्रियों और पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे नदी गतिविधियों में सावधानी बरतें और लाइफ जैकेट जैसी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें।
यह घटना एक बार फिर नदी आधारित पर्यटन की चुनौतियों को उजागर करती है, जहां प्राकृतिक सुंदरता के साथ जोखिम भी जुड़े हैं।