Headlines

Dehradun News:-शरीर में सन्निहित शक्ति-केन्द्र

देहरादून – शरीर में सन्निहित शक्ति-केन्द्र या चक्र

मानव शरीर में सन्निहित चक्र विविध प्रकार की अद्भुत शक्तियों के इंद्र हैं। ये समस्त चक्र मेरुदण्ड के मूल से प्रारम्भ होकर उसके ऊपरी भाग तक जुड़े हैं। साधारण अवस्था में ये चक्र बिना खिले कमल के सदृश प्रधोमुख हुए अविकसित रहते हैं।

ब्रह्मचर्य पालन, प्राणायाम एवं ध्यान आदि पौगिक विधियों द्वारा उत्तेजना पाकर जब ये ऊर्ध्वमुख होकर विकसित होते।तब उनकी अलौकिक शक्तियों का विकास होता है।

चित्रों द्वारा दिखलाई जानेवाली चक्रों की स्लूल आकृतियाँ उनके सूक्ष्म स्वरूप का बोध कराने के लिए केवल प्रतीकात्मक हैं।

इसी प्रकार Pelvic Plexus (पेल्विक प्लेक्सस) आदि अंग्रेजी नाम भी उनके वास्तविक स्थानों को नहीं बतलाते, अपितु संकेत-मात्र करते हैं।

चक्रों का संक्षिप्त वर्णन

चक्रों के सम्बन्ध में भगवान् अथर्ववेद में कहते हैं : अष्टाचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या। तस्यां हिरण्ययः कोशः स्वर्गों ज्योतिषावृतः ॥

देवों की नगरी अयोध्या-रूपी इस देह में अष्टचक्र और नौ द्वार (दो आँखें, दो नासिका, दो कान, मुख, पायु और उपस्थ) हैं। इसी नगरी में एक देदीप्यमान हिरण्यय कोष है,

जो अनन्त, अपरिमित, असीम सुख-शान्ति, आनन्द एवं दिव्य ज्योति से परिपूर्ण है। योगाभ्यासी उपासक साधक ही इस दिव्य कोष (खजाने) को प्राप्त कर सकता है। अब हम संक्षेप में चक्रों के सम्बन्ध थे वर्णन करते हैं।

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WordPress Hub JuliStudio – Portfolio & Agency Theme July – eCommerce WordPress Theme July Morison | Event Photographer’s Portfolio WordPress Theme Jumbo: A 3-in-1 full-screen menu for WordPress Jumpkins – Music & Event Elementor Template Kit Junction — External Links Controller for WordPress Junio – E-Sport Gaming Events & Streamer Elementor Template Kit Junk Data Cleaner For WordPress Junko – Technology Theme for WooCommerce WordPress Jupi – Product Landing WordPress Theme