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Siren:- हर महीने 9 तारीख को बजेगा भूकम्प का सायरन, 11 बजे होगा सिस्टम का टेस्ट; घबराने की जरूरत नहीं

देहरादून 08 अक्टूबर 2026।

उत्तराखंड में भूकम्प के प्रति आमजन को जागरूक करने और भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को हर समय सक्रिय एवं दुरुस्त रखने के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है।

अब हर माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे पूरे राज्य में भूकम्प का सायरन बजाया जाएगा।

हालांकि यह सायरन किसी वास्तविक भूकम्प की चेतावनी नहीं होगा। इसे केवल भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के नियमित परीक्षण और जनजागरूकता के उद्देश्य से बजाया जाएगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने देर शाम सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के साथ बैठक कर इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर चर्चा की।

भूकम्प की दृष्टि से संवेदनशील है उत्तराखंड

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखंड भूकम्प की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है।

राज्य का बड़ा भू-भाग भूकम्पीय दृष्टि से संवेदनशील जोन चार और पांच में आता है।

ऐसे में भूकम्प के प्रति जनजागरूकता, पूर्व तैयारी और समय रहते चेतावनी मिलना बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत स्थापित सेंसर और सायरनों की नियमित जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक आपदा के समय पूरी प्रणाली अपनी क्षमता के साथ काम कर सके।

9 तारीख को सुबह 11 बजे होगा सायरन का परीक्षण

हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजने वाला सायरन नियमित परीक्षण का हिस्सा होगा।

इस दौरान यह जांच की जाएगी कि अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए सायरन सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।

यदि किसी स्थान पर तकनीकी खराबी सामने आती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाएगा।

नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान हो सकेगी और वास्तविक भूकम्प के दौरान चेतावनी प्रणाली के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

उत्तराखंड में 169 सेंसर और 112 सायरन

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के अनुसार वर्तमान में उत्तराखंड में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं।

इन सेंसरों के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है और निर्धारित प्रणाली के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जाती है।

यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से इस परियोजना के तहत और अधिक सेंसर स्थापित करने का प्रस्ताव भी गतिमान है।

अतिरिक्त सेंसर लगने से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता को और मजबूत किया जा सकेगा।

6 अक्टूबर के भूकम्प में भी मिली थी पूर्व चेतावनी

सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 6 अक्टूबर 2026 की रात 10:23 बजे चमोली जिले के थराली के निकट 4.9 तीव्रता का भूकम्प आया था। इसकी गहराई लगभग 13 किलोमीटर बताई गई।

उन्होंने बताया कि इस घटना के दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के आम लोगों तक पहुंचने से पहले ही चेतावनी प्राप्त हुई।

भूदेव मोबाइल ऐप और स्थापित सायरनों के माध्यम से लोगों को चेतावनी मिली।

उन्होंने कहा कि भूकम्प जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

इससे लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने, गैस और विद्युत उपकरण बंद करने तथा आवश्यक सावधानी बरतने का समय मिल सकता है।

सायरन की आवाज से परिचित होंगे लोग

हर महीने सायरन बजाने का एक प्रमुख उद्देश्य आम लोगों को इसकी आवाज से परिचित कराना भी है।

सामान्य परिस्थितियों में लोगों को यह पता नहीं होता कि वास्तविक भूकम्प के समय चेतावनी सायरन कैसा सुनाई देगा।

नियमित परीक्षण के कारण लोग सायरन की आवाज को पहचान सकेंगे।

इससे वास्तविक भूकम्प की स्थिति में चेतावनी मिलने पर अनावश्यक भ्रम और भय की स्थिति को कम करने में मदद मिलेगी।

आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि जागरूक, सतर्क और आपदा के लिए तैयार करना है।

भूदेव ऐप पर भी आएगा परीक्षण संदेश

सायरन के साथ-साथ हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे भूदेव मोबाइल ऐप के उपयोगकर्ताओं को भी परीक्षण संदेश प्राप्त होगा।

मोबाइल फोन में वाइब्रेशन और बीप-बीप की ध्वनि के माध्यम से चेतावनी संकेत दिया जाएगा।

विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल में भूदेव मोबाइल ऐप और सचेत ऐप का अपडेटेड वर्जन रखें।

साथ ही दोनों ऐप को लोकेशन की अनुमति हमेशा के लिए प्रदान करें, ताकि संबंधित क्षेत्र के लिए जारी भूकम्प पूर्व चेतावनी समय पर मोबाइल फोन तक पहुंच सके।

आमजन के लिए यूएसडीएमए की अपील

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन बजने पर घबराएं नहीं।

यह भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के परीक्षण और जनजागरूकता के लिए होगा।

लोगों से अपील की गई है कि—

  • मोबाइल फोन में भूदेव और सचेत ऐप का अपडेटेड वर्जन रखें।

  • दोनों ऐप को लोकेशन की अनुमति प्रदान करें।

  • सायरन की आवाज को ध्यान से पहचानें।

  • मासिक परीक्षण के दौरान घबराएं नहीं।

  • परिवार के सदस्यों, बच्चों और बुजुर्गों को भी इस व्यवस्था की जानकारी दें।

  • भूकम्प के दौरान सुरक्षित व्यवहार की जानकारी प्राप्त करें।

  • आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से आयोजित होने वाली मॉक ड्रिल में सक्रिय भागीदारी करें।

महत्वपूर्ण: हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे सुनाई देने वाला सायरन वास्तविक भूकम्प की सूचना नहीं, बल्कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली का निर्धारित परीक्षण होगा।

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