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Strike:- एफ.ए.एस.टी विधि से स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान का आसान तरीका

ऋषिकेश 2 नवम्बर 2025।

विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश द्वारा जन जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किया ।

इस के साथ ही सीपीआर पर व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।

इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आम लोगों सहित टीन एज के छात्र-छात्राओं को स्ट्रोक से बचाव और इसके खतरों के प्रति आगाह किया।

विश्व भर में बढ़ रहे स्ट्रोक के खतरे, इसकी वजह और पहिचान के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश द्वारा विश्व स्ट्रोक दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

संस्थान के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के तत्वाधान में देहरादून के सांई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में सीपीआर के बारे में व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर,

लोगों को सीपीआर देने की विधि समझायी गयी और स्ट्रोक जागरूकता पर लाभप्रद जानकारियां दी गयीं।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉक्टर) मीनू सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए,

सामुदायिक चिकित्सा विभाग की डाॅ. मधुरी ने बताया कि इस वर्ष की थीम “हर मिनट मायने रखता है”

(एवरी मिनट काउन्ट्स) समय पर कार्यवाही की महत्ता को रेखांकित करती है।

कहा कि खासतौर से स्ट्रोक और हृदयाघात जैसी आकस्मिक चिकित्सकीय परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है।

उन्होंने स्ट्रोक के बढ़ते खतरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि जीवनशैली में सुधार के माध्यम से स्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डॉ. मधुरी ने एफ.ए.एस.टी विधि के माध्यम से स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान करने का आसान तरीका बताया।

अपने संदेश में प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि इस प्रकार का प्रशिक्षण विद्यार्थियों को न केवल जीवनरक्षक कौशल प्रदान करता है,

बल्कि समाज में आपातकालीन स्वास्थ्य जागरूकता को भी सशक्त बनाता है।

सत्र में बताया गया कि “एफ” का अर्थ फेस (चेहरा) है। यदि चेहरे का एक भाग ढीला पड़ जाए या हिलने में असमानता हो तो संकेत समझ जाने चाहिए।

“ए” का अर्थ आम्र्स (बांहें)- दोनों बांहें समान रूप से ऊपर न उठ पाना।

“एस” का अर्थ स्पीच (बोली)- बोली का अस्पष्ट या लड़खड़ाना और “टी” का अर्थ टाईम (समय)- तुरंत आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता बुलाना।

इस फार्मूले को एफ.ए.एस.सी विधि का मूल मंत्र बताया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एम्स द्वारा पैरामेडिकल पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों,

एवं संकाय सदस्यों के लिए सीपीआर का व्यवहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

विभाग के अर्शदीप ने बताया कि यह गतिविधि सीपीआर जागरूकता माह (अक्तूबर के प्रथम सप्ताह) के अंतर्गत संचालित पहल का ही एक भाग है।

उन्होंने सीपीआर की तकनीकी प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। सांईं इंस्टीट्यूटशन की प्राचार्या डॉ. संध्या डोगरा ने एम्स ऋषिकेश का आभार प्रकट करते हुए,

इसे जन जागरूकता की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी कार्यक्रम बताया। उल्लेखनीय है कि जन जागरूकता के ऐसे आयोजनों के माध्यम से एम्स ऋषिकेश,

सामुदायिक स्वास्थ्य शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सशक्त बना रहा है।

जिससे स्ट्रोक की रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया एवं आपातकालीन पुनर्जीवन (सीपीआर) की जानकारी समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके,

क्योंकि वास्तव में हर मिनट मायने रखता है। इस अवसर पर डाॅ. आरती सहित अन्य भी मौजूद रहे।

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