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Complex Surgery:- धड़कते दिल पर हुई जटिल सर्जरी, एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों ने बचाई 21 वर्षीय युवक की जान

ऋषिकेश 12 सितम्बर 2026।

एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा विशेषज्ञों ने नुकीली वस्तु से दिल में लगी गंभीर चोट (पेनिट्रेटिंग कार्डियक इंजरी) के एक अत्यंत जटिल मामले में सफल सर्जरी कर 21 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता हासिल की है।

खास बात यह रही कि यह सर्जरी हार्ट-लंग मशीन के बिना धड़कते हुए दिल पर की गई, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ऑफ-पंप कार्डियक सर्जरी कहा जाता है और इसे बेहद जोखिमपूर्ण माना जाता है।

एम्स के ट्रॉमा सर्जरी विभाग द्वारा यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन गत 27 अगस्त को किया गया था।

ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एम.क्यू. आजम ने बताया कि दिल में गहरी चोट लगने के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है।

ऐसे मरीजों की जान बचाने में विभिन्न चिकित्सा विभागों के बीच बेहतर समन्वय और टीमवर्क की अहम भूमिका रहती है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और नर्सिंग टीमों के उत्कृष्ट सहयोग से यह सफलता संभव हो सकी।

ट्रॉमा सर्जन डॉ. नीरज सिंह ने बताया कि श्यामपुर निवासी 21 वर्षीय अखिल सती को उनके पिता 27 अगस्त की मध्यरात्रि में गंभीर हालत में ट्रॉमा इमरजेंसी लेकर पहुंचे थे।

जांच में पता चला कि युवक के दिल में किसी अत्यंत नुकीली वस्तु से गहरी चोट लगी थी,

जिसके कारण उसका रक्तचाप खतरनाक स्तर तक गिर गया था। दिल के फटने जैसी स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण था।

उन्होंने बताया कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल जीवनरक्षक सर्जरी का निर्णय लिया गया।

हालत इतनी नाजुक थी कि ऑपरेशन हार्ट-लंग मशीन के बिना ही करना पड़ा। चिकित्सकों की टीम ने धड़कते हुए दिल पर सफल ऑपरेशन कर युवक की जान बचाई।

सर्जरी के बाद छह दिनों तक गहन चिकित्सा और निगरानी में रखने के पश्चात मरीज को 3 सितम्बर को स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में ट्रॉमा सर्जन डॉ. नीरज कुमार, डॉ. एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित शामिल रहे।

वहीं एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. प्रवीण तलवार, डॉ. संदीप और डॉ. मिन्हाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण सफलता बताया।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के फैकल्टी डॉ. मधुर उनियाल ने कहा कि इस प्रकार की चोटों में मरीजों के जीवित बचने की संभावना बेहद कम होती है,

लेकिन पिछले सात वर्षों में विभाग ने अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों को मजबूत किया है,

जिससे ऐसे दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामलों का सफलतापूर्वक उपचार संभव हो पा रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में ट्रॉमा के क्षेत्र में इस प्रकार की पहली ऑफ-पंप कार्डियक सर्जरी एम्स ऋषिकेश द्वारा सफलतापूर्वक की गई है,

जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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