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Dehradun News:- कपालभाति करने से खत्म होती है कई बीमारी

द्वितीय प्रक्रिया में कपालभाति प्राणायाम


देहरादून – कपाल, अर्थात् मस्तिष्क और भाति का अर्थ होता है- दीप्ति, आभा तेज प्रकाश आदि। जिस प्राणायाम के करने से मस्तिष्क (माथे) पर आभा, आोज एव तेज बढ़ता हो, वह प्राणायाम है- कपालभाति। इस प्राणायाम को विधि भस्त्रिका से थोड़ी अलग है।

भस्त्रिका में रेचक एवं पूरक में समानरूप से श्वास-प्रश्वास पर दबाव डालते हैं, जबकि कपालभाति में मात्र रेचक, अर्थात् श्वास को शक्तिपूर्वक बाहर छोड़ने में ही पूरा ध्यान दिया जाता है। श्वास को भरने के लिए प्रयत्ल नहीं करते; अपितु सहज रूप से जितना श्वास अन्दर चला जाता है, जाने देते हैं,

पूर्व एकाग्रता श्वास को बाहर छोड़ने में ही होती है। ऐसा करते हुए स्वाभाविक रूप है।से पेट में भी आकचन और प्रसारण की क्रिया होती है तथा मूलाधार, स्वाधिष्ठान एवं मणिपूर चक्रों पर विशेष बल पड़ता है।

कपालभाति करने से पहले शिवसंकल्प करें।

कपालभाति प्राणायाम को करते समय मन में ऐसा विचार करना चाहिए, कि जैसे ही में वास को बाहर छोड़ रहा है, इस प्रश्चास के साथ मेरे सारिए, सिमरत रोग बाहर निकल रहे हैं, नष्ट हो रहे हैं। जिसको जो शारीरिक रोग हो.

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उस दोष या विकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, राग, द्वेष आदि के बाहर छोड़ने की भावना करते हुए रेचक करना चाहिए।इस प्रकार रोग के नष्ट होने का विचार श्वास छोड़ते वक्त करने का भी विशेष लाभ होता है।

 

कपालभाति प्राणायाम का समय

एक सेकण्ड में एक बार श्वास को लय के साथ छोड़ना एवं सहज रूप से धारण करना चाहिए। बिना रुके एक मिनट में 60 बार तथा पाँच मिनट में 300 बार कपालभाति प्राणायाम होता है। अत्यधिक बीमार एवं कमजोर व्यक्ति प्रारम्भ में 2-3 मिनट में ही थक जाते हैं।

परन्तु 10-15 दिन में प्रत्येक व्यक्ति 5 भिनट निरन्तर कपालभाति करने का सामर्थ्य अर्जित कर लेता है। कपालभाति की एक आवृत्ति 5 मिनट की अवश्य होनी चाहिए। इससे कम करने पर पूर्ण लाभ की प्राप्ति नहीं होती।

लम्बे समय तक कपालभाति प्राणायाम करते-करते सामथ्यं बढ़ने एवं अभ्यास के परिपक्व होने पर व्यक्ति 15 मिनट तक भी कपालभाति कर सकता है। स्वस्थ एवं सामान्यतया रोगग्रस्त व्यक्ति को कपालभाति 15 मिनट तक करना चाहिए। 15 मिनट में 3 आवृत्तियों में 900 बार कपालभाति हो जाता है।

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कैंसर, एड्स, हेपेटाइटिस, सफेद दाग, सोरायसिस, अत्यधिक मोटापा, इन्फर्टिलिटी, गर्भाशय, ओवरी, ब्रेस्ट या शरीर में कहीं भी गांठ होने पर तथा एम. एस. व एस. एल. ई. जैसे असाध्य रोगों से पीड़ित रोगी आधा घंटा कपालभाति करें। असाध्य रोगी प्रातः सायं दोनों समय कपालभाति आधा-आधा बंटा करें। स्वस्थ एवं सामान्य रोगग्रस्त व्यक्ति को दिन में एक बार प्राणायाम करना ही पर्याप्त है।

मस्तिष्क और मुखमण्डल पर ओज, तेज, आभा तथा सौन्दर्य बढ़ता है। समस्त कफरोग, दमा, श्वास, एलर्जी, साइनस आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।

हृदय, फेफड़ों एवं मस्तिष्क के समस्त रोग दूर होते हैं।मोटापा, मधुमेह, गैस, कब्ज़, अम्लपित्त, किडनी तथा प्रॉस्टेट से सम्बन्धित सभी रोग निश्चित रूप से दूर होते हैं।

कब्ज़ जैसा खतरनाक रोग इस प्राणायाम के नियमित रूप से लगभग 5 मिनट तक प्रतिदिन करने से मिट जाता है। मधुमेह बिना औषधि के नियंत्रित किया जा सकता है तथा पेट आदि का बढ़ा हुआ भार एक माह में 4 से

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6 किलो तक कम किया जा सकता है। हृदय की धमनियों (arteries) में आये हुए अवरोध (blockage) खुल जाते हैं। मन स्थिर, शान्त तथा प्रसन्न रहता है। नकारात्मक विचार नष्ट हो जाते हैं, जिससे डिप्रेशन आदि रोगों से छुटकारा मिलता है।

चक्रों का शोधन तथा मूलाधार चक्र से सहस्त्रार-चक्र पर्यन्त समस्त चक्रो में एक दिव्य शक्ति का संचरण होने लगता है। इस प्राणायाम के करने से आमाशय, अग्न्याशय (पेन्क्रियाज्), यकृत्,प्लीहा, आँत, प्रॉस्टेट एवं किडनी का आरोग्य विशेष रूप से बढ़ता है।

पेट के लिए बहुत से आसन करने पर भी जो लाभ नहीं हो पाता,मात्र इस प्राणायाम के करने से ही सब आसनों से भी अधिक लाभ हो जाता है। दुर्बल आँतों को सबल बनाने के लिए भी यह प्राणा याम सर्वोत्तम है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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