पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की परंपरा है।
01 अक्टूबर 2026, गुरुवार को षष्ठी श्राद्ध किया जा रहा है।
इस वर्ष तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध की स्थिति बनी, जबकि षष्ठी श्राद्ध 1 अक्टूबर को पड़ रहा है।
उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार षष्ठी तिथि 1 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:35 बजे शुरू होकर 2 अक्टूबर को सुबह करीब 10:15 बजे तक रहेगी।
श्राद्ध कर्म के लिए अपराह्न काल को प्रमुख माना जाता है।
क्या है षष्ठी श्राद्ध का महत्व?
पितृ पक्ष में जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ हो, सामान्यतः उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है।
षष्ठी तिथि को जिन पूर्वजों का निधन हुआ था, उनके निमित्त षष्ठी श्राद्ध किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध में श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण, तर्पण, पिंड अर्पण, भोजन और दान आदि किए जाते हैं।
पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की अवधि माना जाता है।
तिथि क्षय के कारण बदला श्राद्ध का क्रम
इस वर्ष पितृ पक्ष में तिथि-क्रम में विशेष स्थिति बनी है। देहरादून सहित उत्तर भारत में 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी से संबंधित श्राद्ध का क्रम रहा,
जिसके बाद 1 अक्टूबर को षष्ठी श्राद्ध किया जा रहा है। स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और श्राद्ध के समय में कुछ मिनट का अंतर संभव है।
षष्ठी श्राद्ध में कैसे करें तर्पण?
श्राद्ध कर्म परिवार की परंपरा और योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन में करना उचित माना जाता है।
सामान्य रूप से पितरों के निमित्त जल, काले तिल, कुश आदि से तर्पण किया जाता है।
सामान्य विधि इस प्रकार मानी जाती है-
. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
. पितरों का स्मरण करते हुए संकल्प लें।
. जल में काले तिल और कुश डालकर तर्पण करें।
. पितरों के निमित्त पिंड अर्पित किए जाते हैं।
. परिवार की परंपरा के अनुसार श्राद्ध भोजन तैयार किया जाता है।
. ब्राह्मण भोजन और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान किया जा सकता है।
. गाय, कुत्ते, कौवे आदि के लिए भोजन निकालने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।
ध्यान रखें कि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में श्राद्ध की विधि में अंतर हो सकता है।
श्राद्ध के लिए अपराह्न काल क्यों महत्वपूर्ण?
श्राद्ध कर्म में दिन के अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है।
उपलब्ध 2026 की पंचांग गणना में 1 अक्टूबर को षष्ठी तिथि दोपहर 12:35 बजे से शुरू होती है और अपराह्न काल में यह तिथि विद्यमान रहती है।
इसी कारण 1 अक्टूबर को षष्ठी श्राद्ध किया जा रहा है।
पितृ पक्ष में किन बातों का रखें ध्यान?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान संयमित जीवन, सात्विक भोजन और पितरों के प्रति श्रद्धा रखने पर जोर दिया जाता है।
इस अवधि में जरूरतमंदों को भोजन कराना और सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है।
श्राद्ध कर्म में दिखावे के बजाय श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार कर्म करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
किसी विशेष विधि, दोष या पारिवारिक परंपरा को लेकर संशय हो तो स्थानीय पुरोहित से परामर्श लेना बेहतर है।
पितृ पक्ष कब तक चलेगा?
2026 में पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
सर्वपितृ अमावस्या को उन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका निर्धारित तिथि पर श्राद्ध किसी कारण से न हो पाया हो।
📌 विशेष सूचना
1 अक्टूबर 2026 — षष्ठी श्राद्ध,
तिथि प्रारंभ — लगभग दोपहर 12:35 बजे,
अपराह्न श्राद्ध काल — लगभग 1:17 बजे से 3:41 बजे तक (स्थान के अनुसार अंतर संभव),
पितृ पक्ष का समापन — 10 अक्टूबर, सर्वपितृ अमावस्या।
पंचांग के समय शहर के अनुसार बदल सकते हैं। श्राद्ध जैसे धार्मिक कर्म के लिए स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।