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Simplicity:- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती आज, सत्य-अहिंसा और सादगी के आदर्शों को नमन

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026।

देश आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मना रहा है।

हर वर्ष 2 अक्टूबर को आने वाला यह दिन भारतीय इतिहास के दो ऐसे महान व्यक्तित्वों की स्मृति से जुड़ा है, जिन्होंने अपने जीवन, विचार और कर्म से देश को नई दिशा दी।

वर्ष 2026 में 2 अक्टूबर शुक्रवार को है और केंद्र सरकार के अवकाश कैलेंडर में यह दिन महात्मा गांधी के जन्मदिन के रूप में राजपत्रित अवकाश है।

लाल बहादुर शास्त्री: सादगी, ईमानदारी और दृढ़ नेतृत्व की मिसाल

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था।

उनका जीवन कठिन परिस्थितियों में शुरू हुआ, लेकिन संघर्षों ने उनके व्यक्तित्व में दृढ़ता, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का भाव पैदा किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, बाल्यावस्था में ही पिता के निधन के बाद उनका पालन-पोषण उनकी माता ने किया।

आगे चलकर उन्होंने काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि मिली, जो बाद में उनके नाम का स्थायी हिस्सा बन गई।

स्व शास्त्री , महात्मा गांधी के विचारों से गहराई से प्रभावित थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने सक्रिय भागीदारी की और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आंदोलनों में शामिल होने के कारण कई बार जेल भी गए।

प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान उन्होंने कुल लगभग सात वर्ष ब्रिटिश जेलों में बिताए।

आजादी के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

वे रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और गृह मंत्री जैसे पदों पर रहे।

9 जून 1964 को उन्होंने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला और 11 जनवरी 1966 तक इस पद पर रहे।

‘जय जवान, जय किसान’ ने जगाया राष्ट्रीय आत्मविश्वास

लाल बहादुर शास्त्री का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल भले ही अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन इस दौरान देश ने कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना किया।

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौर में उनके नेतृत्व ने राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता और आत्मविश्वास का संदेश दिया।

इसी दौर में उनका प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान, जय किसान’ देश के सैनिकों और किसानों के योगदान को सम्मान देने वाला राष्ट्रीय संदेश बन गया।

यह नारा आज भी भारत के सुरक्षा तंत्र और कृषि व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करता है।

स्व शास्त्री  का व्यक्तित्व उनके पद से अधिक उनकी सादगी, विनम्रता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए याद किया जाता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी भी उनके व्यक्तित्व में विनम्रता के साथ दृढ़ आंतरिक शक्ति और प्रशासनिक दक्षता को रेखांकित करती है।

महात्मा गांधी: सत्य और अहिंसा के मार्गदर्शक

2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को सत्याग्रह और अहिंसा की शक्ति से नई दिशा दी।

गांधी जयंती केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में शांति और अहिंसा के संदेश से जुड़ा महत्वपूर्ण दिवस है।

भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार, गांधी के विचारों का आधार सत्य, अहिंसा और स्वराज था।

उनके सत्याग्रह और अहिंसक प्रतिरोध के विचारों का प्रभाव भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ विश्व के विभिन्न नागरिक अधिकार आंदोलनों पर भी पड़ा।

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2007 में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मान्यता दी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गांधी जयंती की  पर अपने संदेश में गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक बताया।

उन्होंने गांधी के ‘सर्वोदय’ के विचार को सभी के कल्याण और समावेशी विकास की भावना से जोड़ा।

गांधी और शास्त्री: अलग दौर, लेकिन मूल्यों की समान विरासत

महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जीवन अलग-अलग ऐतिहासिक परिस्थितियों में आगे बढ़ा, लेकिन दोनों के व्यक्तित्व में कई मूल्य समान दिखाई देते हैं।

दोनों ने सादगी, सत्यनिष्ठा, अनुशासन, त्याग और राष्ट्रसेवा को महत्व दिया।

गांधी ने स्वतंत्रता संघर्ष को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि शास्त्री ने स्वतंत्र भारत के सामने आई चुनौतियों के बीच शासन का नेतृत्व किया।

शास्त्री स्वयं गांधी के विचारों से प्रभावित थे और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके आह्वान से प्रेरित होकर राष्ट्रीय संघर्ष में शामिल हुए थे।

आज के दौर में दोनों महापुरुषों की विरासत का महत्व

2 अक्टूबर केवल दो महान नेताओं की जयंती मनाने का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों पर आत्ममंथन का दिन भी है।

गांधी का सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता का संदेश आज भी सार्वजनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

वहीं शास्त्री जी का सादगीपूर्ण जीवन, कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता और देश के जवान तथा किसान को समान महत्व देने का संदेश आज भी सार्वजनिक जीवन में आदर्श के रूप में स्मरण किया जाता है।

गांधी जयंती के अवसर पर देशभर में प्रार्थना सभाएं, स्वच्छता अभियान, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और विभिन्न सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

राजघाट सहित देश के विभिन्न हिस्सों में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी जाती है।

श्रद्धा के साथ संकल्प का भी दिन

महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती हमें यह याद दिलाती है कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े पदों और घोषणाओं से नहीं,

बल्कि व्यक्तिगत आचरण, ईमानदारी, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी से भी होता है।

2 अक्टूबर इसलिए स्मरण का ही नहीं, बल्कि संकल्प का दिन भी है।

सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने, कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहने और देशहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर शत-शत नमन।

स्रोत: भारत सरकार, प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी।

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