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Devotees :- श्री नंदा देवी बड़ीजात 2026 होमकुंड तक पहुंचे 25 हजार से अधिक श्रद्धालु

देहरादून 05 अक्टूबर 2026।

उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी और जनमानस की अगाध आस्था की प्रतीक श्री नंदा देवी बड़ीजात 2026 का ऐतिहासिक,

एवं सफल आयोजन 5 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक संपन्न हुआ।

सीमित संसाधनों के बावजूद श्रद्धालुओं, ग्रामीणों, व्यापार मंडलों, स्थानीय युवाओं, सामाजिक संगठनों और जनमानस के व्यापक सहयोग से करीब 280 किलोमीटर लंबी पैदल धार्मिक यात्रा भव्यता, धार्मिक पवित्रता और परंपरागत विधि-विधान के साथ निर्विघ्न पूरी हुई।

आयोजन समिति के अनुसार पंचांग गणना के आधार पर 12 वर्ष के निर्धारित अंतराल में आयोजित होने वाली इस बड़ीजात का आयोजन इस बार निर्धारित समय पर हुआ।

यात्रा के दौरान किसी अप्रिय घटना के बिना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कठिन पहाड़ी मार्गों को पार करते हुए मां नंदा देवी के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट की।

280 किलोमीटर की यात्रा में जनसहयोग बना सबसे बड़ा आधार

बड़ीजात आयोजन समिति ने बताया कि यात्रा मार्ग में जहां कहीं पैदल रास्तों, पुलों अथवा अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं की आवश्यकता पड़ी,

वहां श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने अपने संसाधनों से निर्माण एवं मरम्मत का कार्य किया।

कठिन रूपकुंड-ज्योंरा गली मार्ग पर प्रशिक्षित स्थानीय युवकों ने यात्रियों को सुरक्षित पार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यात्रा के निर्जन और दुर्गम पड़ावों पर भी स्थानीय ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और ठहरने की व्यवस्था अपने स्तर से की।

नंदानगर व्यापार मंडल, ग्रामीणों, प्रबुद्धजनों और अन्य लोगों ने जगह-जगह भंडारों का आयोजन कर यात्रियों की सेवा की।

निःशुल्क चिकित्सा सुविधा ने दिया यात्रियों को संबल

यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद चिकित्सा हेल्थ मिशन की ओर से विभिन्न निर्जन पड़ावों पर श्रद्धालुओं को निःशुल्क दवाइयां और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

वहीं बेदनी बुग्याल में बड़ीजात आयोजन समिति की ओर से यात्रियों का मेडिकल एवं स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया, ताकि उन्हें आगे की कठिन यात्रा के लिए आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके।

डोलियों, पूजारियों और श्रद्धालुओं का ग्रामीणों ने किया आतिथ्य

मां नंदा की देवडोलियों, छंतोलियों, निशानों, पूजारियों और श्रद्धालुओं के साथ-साथ यात्रा को कवर करने पहुंचे यूट्यूबर एवं ब्लॉगरों के रहने और भोजन की व्यवस्था भी ग्रामीणों ने अपने स्तर पर की।

आयोजन समिति ने इसे उत्तराखंड की अतिथि देवो भवः की परंपरा और सामुदायिक एकजुटता का उदाहरण बताया।

डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु बने यात्रा के साक्षी

बड़ीजात यात्रा में इस बार जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देखने को मिला।

समिति के अनुसार संपूर्ण यात्रा में 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया, जबकि होमकुंड तक की कठिन पदयात्रा में 25 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।

इस धार्मिक यात्रा में 80 वर्ष से अधिक आयु के कई बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने भी उत्साह और आस्था के साथ भाग लिया।

गढ़वाल और कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के अलावा देश के अन्य राज्यों तथा विदेशों से आए लोगों ने भी मां नंदा की यात्रा में सहभागिता की।

कुरुड़ से होमकुंड तक देवडोलियों और छंतोलियों की रही सहभागिता

मां नंदा देवी सिद्धपीठ कुरुड़ से प्रारंभ हुई बड़ीजात में विभिन्न क्षेत्रों की देवडोलियां, छंतोलियां, निशान और चौसिंग्या खाड़ू शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से—

– श्री नंदा देवी कुरुड़ दशोली की डोली।- श्री नंदा देवी कुरुड़ बंड की डोली,- श्री ज्वाल्पा देवी ल्वाणी की डोली,- फरस्वाण-फाट के जाख देवता।

– बंड भूम्याल, रजकोटी, बिरही घाटी और कर्णप्रयाग क्षेत्र समेत लगभग 40 भूम्याल की छंतोलियां, तीन चौसिंग्या खाड़ू ,गाड़ी से गाडूघड़ा के पश्वा,

लाटू के निशान एवं पश्वा, सैजी से आदित्य भगवान के निशान ने परंपरानुसार यात्रा में सहभागिता की।

कुमाऊं से भी पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

बड़ीजात में कुमाऊं मंडल की सहभागिता भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। चंद वंशज राजा करन चंद्र राज सिंह उर्फ केसी सिंह बाबा एवं उनके पुत्र युवराज नरेंद्र चंद्र राज सिंह के निर्देशानुसार कुमाऊं की ओर से शिष्टमंडल ने यात्रा में सहभागिता की।

नंदा देवी मंदिर समिति अल्मोड़ा के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा कि मां नंदा केवल कुमाऊं की आराध्य देवी नहीं,

बल्कि संपूर्ण उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान हैं।

बड़ीजात यात्रा में कुमाऊं की सहभागिता से गढ़वाल और कुमाऊं की साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे को मजबूती मिली है।

इस अवसर पर मुन्ना वर्मा ने नंदा देवी अल्मोड़ा का प्रतिनिधित्व किया, जबकि नंदा देवी कमेटी भवाली, नैनीताल की ओर से उपाध्यक्ष कंचन सुयाल और कोषाध्यक्ष लोकेश जोशी ने सहभागिता की।

पर्यटन विभाग और चमोली प्रशासन का जताया आभार

आयोजन समिति ने बताया कि समिति के आग्रह पर पुराने यात्रा रूट मैप में आवश्यक संशोधन किया गया।

पर्यटन विभाग, उत्तराखंड सरकार और चमोली प्रशासन द्वारा गढ़वाल एवं कुमाऊं से जुड़े संपूर्ण यात्रा रूट मैप को उत्तराखंड टूरिज्म की वेबसाइट पर अंकित करने की दिशा में किए गए सहयोग के लिए समिति ने आभार जताया।

समिति के अनुसार इससे भविष्य में मां नंदा की धार्मिक यात्रा को समझने, उसके मार्ग की जानकारी प्राप्त करने और श्रद्धालुओं को यात्रा की बेहतर तैयारी करने में सुविधा मिलेगी।

अब 2027 में लोकजात, 2032 में अर्द्धजात और 2038 में अगली बड़ीजात

बड़ीजात आयोजन समिति ने आगामी यात्राओं की समय-सारणी भी स्पष्ट की है। परंपरा और विधि-विधान के अनुसार।

2027 में मां नंदा देवी की वार्षिक लोकजात आयोजित होगी।

2032 में सप्तकुंड अर्द्धजात का आयोजन होगा।

2038 में अगली मां नंदा देवी बड़ीजात का भव्य आयोजन प्रस्तावित है।

11 से 20 अक्टूबर तक कुरुड़ में नवरात्र पूजन

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर मां नंदा देवी सिद्धपीठ मंदिर नंदाधाम, कुरुड़ में 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक विशेष पूजा-अर्चना एवं नवरात्र पूजन का आयोजन किया जाएगा।

20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर मां के प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन होगा।

आयोजन समिति ने बड़ीजात 2026 में शामिल सभी देवडोलियों, छंतोलियों, निशानों, चौसिंग्या खाड़ू के स्वामियों,

 देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं से परिवार सहित सिद्धपीठ नंदाधाम, कुरुड़ पहुंचकर मां का प्रसाद एवं आशीर्वाद ग्रहण करने का आग्रह किया है।

आयोजन समिति ने जताया आभार

पत्रकार वार्ता में आयोजन समिति ने कहा कि यात्रा से पहले वर्ष 2026 और 2027 को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को दूर करते हुए,

उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा की 12 वर्षीय श्री नंदा देवी बड़ीजात 2026 का आयोजन श्रद्धालुओं के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

समिति ने यात्रा को ऐतिहासिक, भव्य और निर्विघ्न बनाने में सहयोग देने वाले प्रत्येक श्रद्धालु, ग्रामीण, युवा, व्यापारी,

चिकित्सा दल, प्रशासन, पर्यटन विभाग, मीडिया प्रतिनिधियों, यूट्यूबरों और ब्लॉगरों का आभार व्यक्त किया।

पत्रकार वार्ता में अशोक गौड़, पुजारी प्रकाश गौड़, धनी राम गौड़ बधाण पुजारी, भगवती प्रसाद मैंदोली और गौर सिंह नेगी सहित आयोजन से जुड़े पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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