भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा तैयारियों और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने कहा है कि चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के आधुनिकीकरण में भारी निवेश किया है।
ऐसे में चीन का मुकाबला केवल पारंपरिक युद्ध तकनीकों के सहारे करना कठिन होगा।
उन्होंने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
23 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, ITBP प्रमुख ने राजस्थान के अलवर में हिमवीर सम्मान समारोह के दौरान जवानों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उनका बयान ऐसे समय आया है, जब अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बने रहने की जानकारी भी सामने आई है।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और तकनीक निर्णायक
आईटीबीपी प्रमुख के मुताबिक, बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष समेत विभिन्न युद्धों से यह स्पष्ट हुआ है कि ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियां सैन्य ताकत के पारंपरिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि चीन ने अपने सैन्य ढांचे और क्षमताओं को मजबूत करने में बड़े स्तर पर निवेश किया है।
ऐसे में भारत को भी आधुनिक तकनीक, बेहतर हथियारों, प्रशिक्षण और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
आईटीबीपी में आधुनिकीकरण की तैयारी
आईटीबीपी प्रमुख ने बताया कि बल की सीमा सुरक्षा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित की गई हैं।
जवानों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने के साथ ड्रोन निर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
बल ने गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारी के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम से नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया है।
वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को इस प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य बताया गया है।
इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमिगत सुरक्षित ढांचे तैयार करने, पुराने हथियारों के आधुनिकीकरण और अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में जवानों की परिचालन क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।
अरुणाचल सीमा पर आमने-सामने की स्थिति का जिक्र
रिपोर्टों के अनुसार,
आईटीबीपी प्रमुख ने अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति का भी उल्लेख किया।
उन्होंने नई गठित शौर्य कमांडो टीमों के प्रदर्शन की सराहना की। इन टीमों को सीमावर्ती बटालियनों में तैनात करने की योजना बताई गई है।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम माना जाता है।
विदेश मंत्रालय भी सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर देता रहा है।
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर उठाए सवाल
आईटीबीपी प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की रक्षा नीतियों पर निशाना साधा है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सेना के आधुनिकीकरण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया,
और अग्निवीर योजना से सैनिकों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कांग्रेस ने चीन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख की भी आलोचना की है।
पार्टी ने गलवान संघर्ष के बाद प्रधानमंत्री के बयान, चीन के साथ कूटनीतिक संबंधों और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत को लेकर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं।
आईटीबीपीप्रमुख की उपलब्ध टिप्पणियों में चीन की सैन्य क्षमताओं, आधुनिक युद्ध तकनीक और सीमा सुरक्षा बल के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्या हैं अहम सवाल?
चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के बीच भारत के सामने सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने,
आधुनिक तकनीक अपनाने, सैनिकों को बेहतर प्रशिक्षण देने और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की चुनौती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है कि रक्षा आधुनिकीकरण, सैन्य संसाधनों की उपलब्धता,
सैनिकों की परिचालन तैयारियों और सीमा पर मौजूदा स्थिति से जुड़े सवालों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा हो।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, देश की सुरक्षा और जवानों की क्षमता को मजबूत करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।