नई दिल्ली 31 अक्टूबर 2026। देश की रक्षा में तैनात सैनिकों का जीवन और उनके परिवारों का इंतजार अक्सर ऐसी कहानियां छोड़ जाता है,
जिन्हें सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं। भारतीय सेना के जवान थॉमस चेरियन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
56 साल पहले एक विमान हादसे में लापता हुए इस जवान के पार्थिव अवशेष आखिरकार सितंबर 2024 में बरामद हुए।
इसके बाद 4 अक्टूबर 2024 को केरल में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
7 फरवरी 1968 को हुआ था विमान हादसा
जानकारी के अनुसार, 7 फरवरी 1968 को भारतीय वायुसेना का AN-12 परिवहन विमान चंडीगढ़ से लेह के लिए रवाना हुआ था। विमान में सैनिकों सहित कुल 102 लोग सवार थे।
हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे के निकट बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र में विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें सवार सभी लोग लापता हो गए।
इस विमान में 22 वर्षीय थॉमस चेरियन भी सवार थे, जो भारतीय सेना की EME (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मैकेनिकल इंजीनियर्स) कोर में क्राफ्ट्समैन के पद पर कार्यरत थे।
हादसे के बाद उनका परिवार दशकों तक उनकी कोई खबर मिलने की उम्मीद लगाए रहा।
56 साल बाद बर्फ में मिले पार्थिव अवशेष
सितंबर 2024 में भारतीय सेना की डोगरा स्काउट्स और पर्वतीय खोज अभियान में जुटी टीमों ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित धाका ग्लेशियर के पास खोज अभियान चलाया।
29 सितंबर को अभियान के दौरान चार सैनिकों के पार्थिव अवशेष बरामद किए गए।
इनमें थॉमस चेरियन के अवशेषों की पहचान उनकी वर्दी पर मिले नाम के टैग और व्यक्तिगत दस्तावेजों के आधार पर की गई।
इस खोज ने 56 वर्षों से अपने प्रियजन की प्रतीक्षा कर रहे परिवार को आखिरकार अपने बेटे के बारे में अंतिम जानकारी दी।
4 अक्टूबर 2024 को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
3 अक्टूबर को उनके पार्थिव अवशेष तिरुवनंतपुरम लाए गए। इसके बाद 4 अक्टूबर को केरल के पथनमथिट्टा जिले के एलंथूर स्थित उनके पैतृक गांव में पार्थिव अवशेष पहुंचाए गए।
करूर स्थित सेंट पीटर्स ऑर्थोडॉक्स चर्च में धार्मिक विधियों के साथ पूरे सैन्य सम्मान से उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
इस दौरान सेना के जवानों, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
एक सैनिक की घर वापसी, परिवार के 56 वर्षों के इंतजार का अंत
थॉमस चेरियन की कहानी केवल एक सैनिक की बरामदगी और अंतिम विदाई की घटना नहीं है,
बल्कि यह उन परिवारों के धैर्य और पीड़ा की भी कहानी है,
जो देश की रक्षा में अपने प्रियजनों को खोने के बाद वर्षों तक उनकी प्रतीक्षा करते रहते हैं।
उनके लापता होने के बाद परिवार ने लंबा इंतजार किया। उनके माता-पिता भी उनके लौटने की आस लिए दुनिया से विदा हो गए।
56 साल बाद जब उनके पार्थिव अवशेष घर पहुंचे, तब परिवार को अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने का अवसर मिला।
देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीर सैनिक थॉमस चेरियन का त्याग और उनके परिवार का धैर्य हमेशा याद किया जाएगा।
वीर सैनिक थॉमस चेरियन को पंचूर वार्ता परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि।