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Scams :- एलयूसीसी घोटाले में SAGA ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, छापे में 30 करोड़ रुपये,संपत्तियां जब्त

नई दिल्ली 20 अगस्त 2026।

लोन और निवेश के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े  एलयूसीसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ई डी) ने SAGA ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।

ईडी की नई दिल्ली स्थित टीम ने 13 से 16 अगस्त 2026 के बीच मुंबई और भोपाल में एलयूसीसी से जुड़े समीर अग्रवाल,

तथा उनके सहयोगियों के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की शेयर-सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, एलआईसी पॉलिसियां और बैंक खातों में जमा रकम जब्त की गई।

ईडी के अनुसार कार्रवाई के दौरान 1.53 करोड़ रुपये नकद, 35.28 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा, करीब 5.25 करोड़ रुपये मूल्य का सोना-चांदी तथा नौ महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।

एजेंसी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही जांच के क्रम में की है।

2009 से निवेश के नाम पर लोगों को जोड़ने का आरोप

ईडी की जांच उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में एलयूसीसी

और उससे जुड़ी सहकारी समितियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2009 से लोगों को फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम के नाम पर निवेश के लिए जोड़ा गया।

आरोप है कि निवेशकों को तीन से पांच वर्ष की अवधि में उनकी रकम दोगुनी या तिगुनी करने का भरोसा दिलाया जाता था।

इसके अलावा कार, मकान और महंगे उपहार देने जैसे प्रलोभन भी दिए जाने की बात जांच में सामने आई है।

10 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का आरोप

ईडी के मुताबिक,एलयूसीसी से जुड़े नेटवर्क ने बैंकिंग व्यवस्था और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का भरोसा देकर आम लोगों से 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई।

जांच के अनुसार शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान किया गया, जिससे योजना में लोगों का विश्वास बढ़ा।

बाद में बड़ी रकम को कथित तौर पर समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों के निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम के एक हिस्से का इस्तेमाल एजेंटों को कमीशन देने में किया गया।

कैश-चेस्ट और हवाला चैनल के इस्तेमाल का आरोप

जांच के दौरान ईडी को कथित तौर पर पता चला कि निवेशकों से बड़ी मात्रा में रकम नकद के रूप में एकत्र की जाती थी।

इसके बाद इस धन को क्षेत्रीय कैश-चेस्ट के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर भेजे जाने का आरोप है।

ईडी के मुताबिक, इस धन को देश और विदेश में अचल संपत्तियों में निवेश करने के लिए कथित तौर पर शेल कंपनियों और हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया गया।

एजेंसी अब निवेशकों से जुटाई गई रकम के अंतिम उपयोग और उससे बनाई गई संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है।

50 से अधिक शेल संस्थानों का नेटवर्क सामने आने का दावा

ईडी की जांच में एलयूसीसी से जुड़े मामले में 50 से अधिक शेल संस्थानों का नेटवर्क सामने आने का दावा किया गया है।

एजेंसी के अनुसार, इन संस्थानों को अलग-अलग ऑपरेटरों के माध्यम से नियंत्रित किया जा रहा था।

जांच का प्रमुख फोकस निवेशकों से जुटाई गई रकम को विभिन्न संस्थाओं और खातों में स्थानांतरित करने तथा उससे कथित तौर पर बनाई गई संपत्तियों का पता लगाने पर है।

समीर अग्रवाल को बताया गया SAGA ग्रुप का मुख्य नियंत्रक

ईडी के अनुसार, समीर अग्रवाल को SAGA ग्रुप का सीएमडी और मुख्य नियंत्रक बताया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि वह फिलहाल फरार है।

मामले में ईडी पहले ही दो अलग-अलग अस्थायी कुर्की आदेशों के जरिए संबंधित संपत्तियों को अटैच कर चुकी है।

वहीं, ग्रुप के प्रमुख पदाधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद ईडी ने 24 जुलाई 2026 को विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की थी।

ईडी के मुताबिक,एलयूसीसी मामले में धन के स्रोत, निवेशकों से जुटाई गई रकम के हस्तांतरण, शेल कंपनियों के नेटवर्क और उससे अर्जित संपत्तियों की जांच जारी है।

एजेंसी की आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

नोट: मामले में लगाए गए आरोप ईडी की जांच और उसके अनुसार सामने आए तथ्यों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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