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Supply:- कोयला आधारित व जल विद्युत से घटा उत्पादन, टिहरी प्लांट की इकाइयां बंद होने से प्रभावित हुई आपूर्ति

देहरादून 23 सितम्बर 2026।

प्रदेश में बढ़ती विद्युत मांग और उपलब्धता के बीच अंतर के कारण पीक आवर्स के दौरान बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

वर्तमान परिस्थितियों में राज्य को औसतन लगभग 350 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है,

जिसके चलते ग्रिड की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ क्षेत्रों में आपातकालीन विद्युत कटौती करनी पड़ रही है।

ऊर्जा विभाग के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर कोयला आधारित विद्युत उत्पादन और पावर एक्सचेंजों से बिजली की सीमित उपलब्धता,

राज्य एवं केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से अपेक्षाकृत कम उत्पादन तथा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयों के तकनीकी कारणों से बंद होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

बताया गया कि वर्तमान में पावर एक्सचेंजों के माध्यम से पीक आवर्स के दौरान अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता अधिकतम दरों पर भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।

वहीं, पिछले कुछ दिनों से शाम के समय पावर ग्रिड की आवृत्ति लगभग 49.50 हर्ट्ज तक बनी हुई है।

ऐसे में ग्रिड की सुरक्षा को देखते हुए नॉर्दर्न रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनआरएलडीसी) द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेने की अनुमति भी सीमित कर दी गई है।

अधिकारियों के अनुसार नदियों में जल प्रवाह कम होने से जल विद्युत उत्पादन पर भी असर पड़ा है।

पिछले वर्ष की तुलना में इस अवधि में राज्य और केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से पीक आवर्स के दौरान औसतन करीब 250 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।

इसके अलावा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद होने से लगभग 100 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता प्रभावित हो रही है।

इन सभी कारणों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में पीक आवर्स के दौरान लगभग 350 मेगावाट बिजली की कमी दर्ज की जा रही है।

मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने तथा ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार कुछ क्षेत्रों में आपातकालीन कटौती की जा रही है।

इस बीच संभावित विद्युत संकट को देखते हुए यूपीसीएल की प्रबंध निदेशक ने संबंधित अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने विद्युत कमी के कारणों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति आसपास के कई राज्यों की तुलना में बेहतर है।

इस पर प्रबंध निदेशक ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर स्थिति में सुधार लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी क्षेत्रीय इकाइयों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष अनुरक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए।

साथ ही स्पष्ट किया कि नए निर्माण कार्यों और परियोजनाओं के लिए अलग से विद्युत आपूर्ति बाधित न की जाए तथा उपभोक्ताओं को न्यूनतम असुविधा के साथ बेहतर बिजली उपलब्ध कराई जाए।

-बिजली संकट के प्रमुख कारण,

-जल विद्युत उत्पादन में लगभग 250 मेगावाट की कमी।

-टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां बंद।

-पावर एक्सचेंजों से सीमित बिजली उपलब्धता।

-कोयला आधारित उत्पादन में कमी।

-पीक आवर्स में मांग लगातार बढ़ना।

-ग्रिड सुरक्षा के चलते ओवरड्रॉफ्ट पर प्रतिबंध।

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