गजेन्द्र सिंह शेखावत, यूनियन मिनिस्टर ऑफ कल्चर एंड टूरिज्म पर्यटन का विचार भी आकांक्षापूर्ण हो गया। “भारत में विवाह”, राजस्थान और गोवा जैसे विवाह केंद्रों के लिए प्रोत्साहन,
अभियान और अवसंरचना के समर्थन में तब्दील हो गया। इस बीच, चिकित्सा और कल्याण पर्यटन के लिए 2022 में 6 लाख से अधिक विदेशी मरीज आये, जिससे भारत दुनिया के अग्रणी उपचार स्थलों में से एक बन गया।
2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता, सांस्कृतिक कूटनीति का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन था। दिल्ली तक सीमित रहने के बजाय, खजुराहो से कुमारकोम तक 60 से अधिक गंतव्यों में वैश्विक कार्यक्रमों की मेजबानी हुई,
जिनमें से प्रत्येक को स्थानीय कला, खान-पान और विरासत के साथ तैयार किया गया था। दुनिया भारत के साथ सिर्फ़ संवाद नहीं कर रही थी – बल्कि इसे अनुभव भी कर रही थी।
लेकिन आंकड़ों के पीछे, असली परिवर्तन आध्यात्मिक था। भारत ने दुनिया से अपने स्मारकों को देखने के लिए अनुरोध करना बंद कर दिया। देश ने अपनी यादों को महसूस करने,
अपनी शांति में स्वस्थ होने और अपनी विविधता का जश्न मनाने के लिए पूरी दुनिया को आमंत्रित किया।
इस नए भारत में, पर्यटन मौसमी नहीं है – यह सभ्यतागत है। यह वह स्थल है, जहाँ दर्शन का विकास से, जहाँ तीर्थयात्रा का प्रगति से और जहाँ त्योहार का अवसंरचना से मिलन होता है।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने दुनिया का सिर्फ़ स्वागत नहीं किया – बल्कि उसे गले लगाया।
जैसे भिक्षु बोधि वृक्ष की परिक्रमा करते हैं, जैसे तीर्थयात्री केदारनाथ की ठंडी हवा में मंत्रोच्चार करते हैं, जैसे दुल्हनें महलनुमा गुंबदों के नीचे विवाह करती हैं ।
और जैसे सीमावर्ती गाँव उत्सुक यात्रियों की मेजबानी करते हैं, एक सच्चाई हर पवित्र मार्ग और शांत गलियारे में गूंजती है: भारत केवल एक गंतव्य नहीं है, जहाँ की आप यात्रा करते हैं – यह एक ऐसा देश है, जहाँ आप कुछ शाश्वत की तलाश में बार-बार वापस आते हैं।